सामना संवाददाता / मुरादाबाद
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद में रेडियोडॉग्नोसिस विभाग के सीनियर प्रोफेसर प्रो. राजुल रस्तोगी ने सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन एओसीआर एसजीसीआर-डब्ल्यूआईआरईएस 2026 में ग्रीन रेडियोलॉजी एवम् पर्यावरण अनुकूलता पर दो शोध पत्र प्रस्तुत करके अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी उत्कृष्टता का परचम लहराया है। इस विशिष्ट उपलब्धि के लिए उन्हें इंटरनेशनल लेवल पर प्रतिष्ठित ट्रैवल अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। इस इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में दुनिया भर के लगभग 42 देशों से प्राप्त करीब 600 स्वीकृत एब्सट्रैक्ट्स में से केवल 60 उत्कृष्ट शोध पत्रों को ही प्रस्तुतीकरण के लिए चुना गया, जिनमें प्रो. रस्तोगी के दोनों शोध पत्र शामिल रहे।
सम्मेलन में प्रो. रस्तोगी ने आपदा प्रबंधन में रेडियोलॉजी की भूमिका पर रेजिलेंस बाय डिजाइनः द ट्रिपल-एस ब्लूप्रिंट फॉर सस्टेनेबल रेडियोलॉजी इकोसिस्टम्स इन डिजास्टर मैनेजमेंट और रेडियोलॉजी वेस्ट मैनेजमेंट पर सस्टेनेबल मैनेजमेंट, एक्सट्रैक्शन एंड रिसाइकिलिंग ऑफ आयोडाइन इन डायग्नोस्टिक रेडियोलॉजी पर पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस उपलब्धि और शोध के दूरगामी प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए प्रो. रस्तोगी ने कहा, रेडियोलॉजी में सस्टेनेबिलिटी एक अत्यंत आवश्यक और उभरती हुई सोच है। मेडिकल इमेजिंग में कार्बन फुटप्रिंट को समझना और हाई-टेक डायग्नोस्टिक्स में पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को शामिल करना अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आधुनिक चिकित्सा का भविष्य बन चुका है। उन्होंने कहा, रेडियोलॉजी का मूल सिद्धांत यही है कि उचित नैदानिक औचित्य न केवल मरीज के सटीक और बेहतर उपचार को दिशा देता है, बल्कि पर्यावरण के प्रति हमारी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी को भी सुनिश्चित करता है।
