मुख्यपृष्ठविश्वट्रंप के दावे खोखले हैं! ...गले की फांस बन गया चीन दौरा

ट्रंप के दावे खोखले हैं! …गले की फांस बन गया चीन दौरा

डोनाल्ड ट्रंप ने चीन दौरे को बड़ी कूटनीतिक सफलता की तरह पेश किया है, लेकिन उपलब्ध तथ्यों से तस्वीर उतनी चमकदार नहीं दिखती। बीजिंग ने उन्हें सम्मान, समारोह और प्रतीकात्मक गर्मजोशी जरूर दी, मगर ठोस नतीजों के नाम पर अभी अधिकतर बातें ‘प्रारंभिक’ और ‘आगे बातचीत’ के दायरे में हैं। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने भी व्यापार, कृषि और विमानन से जुड़े समझौतों को उत्पादक लेकिन प्रारंभिक बताया है; कई मुद्दों पर मात्रा, समयसीमा और मूल्य जैसे बुनियादी विवरण स्पष्ट नहीं हैं।
ट्रंप के लिए यह दौरा घरेलू राजनीति की दृष्टि से भी अहम था। अमेरिका में ३ नवंबर २०२६ को मध्यावधि चुनाव होने हैं, जिनमें प्रतिनिधि सभा की सभी ४३५ सीटें और सीनेट की ३५ सीटें दांव पर रहेंगी। ऐसे में चीन यात्रा को ‘ऐतिहासिक सफलता’ बताना उनकी गिरती राजनीतिक साख और चुनावी दबाव को संभालने की कोशिश भी माना जा सकता है। बीजिंग ने ट्रंप का सैन्य सम्मान, औपचारिक स्वागत, तालियां बजाते स्कूली बच्चे और शी जिनपिंग के साथ निजी उद्यान की सैर, ये सब उस व्यक्ति के लिए उपयोगी दृश्य थे, जिसकी राजनीति में छवि और प्रदर्शन बहुत मायने रखते हैं। लेकिन यही चीन की कूटनीतिक चाल भी थी: टकराव को बढ़ाए बिना, ट्रंप को सम्मान का आभास देना और असली मुद्दों पर अपनी स्थिति से पीछे न हटना। ट्रंप ने दावा किया कि चीन बोइंग के २०० विमान खरीदेगा और आगे यह संख्या ७५० तक जा सकती है, लेकिन चीन की ओर से इस पर ठोस कारोबारी विवरण नहीं दिए गए। दुनिया ने इस दौरे को ‘ेूaंग्त्ग्ूब् aह् ेूaतस्aूा’, यानी स्थिरता तो आई, लेकिन गतिरोध भी कायम रहा, के रूप में देख रही है। ताइवान, ईरान, एआई और व्यापारिक अवरोधों जैसे बड़े मुद्दों पर कोई निर्णायक पैâसला सामने नहीं आया। सबसे गंभीर संकेत ताइवान पर मिला।
शर्तों के साथ सम्मान
शी जिनपिंग ने साफ चेतावनी दी कि ताइवान प्रश्न को गलत तरीके से संभाला गया तो अमेरिका-चीन संबंध टकराव की दिशा में जा सकते हैं। वहीं ट्रंप का बयान कि ताइवान हथियार सौदा चीन से बातचीत में ‘नेगोशिएटिंग चिप’ हो सकता है, ताइपे के लिए चिंता का कारण बन गया है। इसलिए निष्कर्ष साफ है, ट्रंप चीन से खाली हाथ नहीं लौटे, लेकिन भरा हुआ थैला भी साथ नहीं लाए। उन्हें स्वागत मिला, दृश्य मिले, प्रचार की सामग्री मिली; पर असली रणनीतिक जीत चीन के खाते में अधिक दिखती है। बीजिंग ने मुस्कान के साथ संदेश दे दिया, सम्मान मिलेगा, पर शर्तें हमारी होंगी।

अन्य समाचार