-जुबान से आंसुओं की इज्जत का जनाजा!
यदि कोई इंसान वक्त की नजाकत को ठेंगा दिखाते हुए अपनी जुबां खोलता है, तो उसे क्या कहा जाए? बददिमाग, बड़बोला या फिर…अमेरिका का राष्ट्रपति? इस कला में अगर दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के कर्ता-धर्ता डोनाल्ड ट्रंप का नाम शीर्ष स्थान पर आए, तो किसी को भी आश्चर्य का ‘दौरा’ नहीं पड़ना चाहिए। ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के जनाजे को लेकर ट्रंप ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के मंच पर एक ऐसा भड़काऊ ‘स्टैंड-अप कमेडियन’ वाला बयान दे डाला है, जिसने पूरी दुनिया का ब्लड प्रेशर बढ़ा दिया है।
अरे भाई, ४ जुलाई से ईरान में शोक का माहौल है, पूरा शीर्ष नेतृत्व एक छत के नीचे जमा है। ऐसे में ट्रंप साहब को अपनी ‘उंगुली’ की ताकत याद आ गई। उन्होंने बड़े ही दार्शनिक अंदाज में दावा कर दिया, ‘मैं चाहूं तो एक ही जोरदार धमाके में ईरान की बची-खुची लीडरशिप को सीधे ऊपर भेज सकता हूं। पर मैं ऐसा करूंगा नहीं, क्योंकि आखिर मैं बड़ा दयावान हूं! और हां, अगर सबको उड़ा दिया, तो फिर शांति की बात किससे करूंगा?’ कमाल की बात यह है कि यह ‘शांति दूत’ वाला ज्ञान तब आया है, जब दोनों देशों के बीच शांति समझौता लागू हो चुका है। ट्रंप साहब की जुबान यहीं नहीं रुकी। जनाजे में फफक-फफक कर रो रहे करोड़ों ईरानियों को देखकर उन्होंने अपनी ‘मनोवैज्ञानिक’ राय भी दे दी कि ये आंसू बिल्कुल ‘मेड इन चाइना’ यानी फर्जी हैं, क्योंकि उनके हिसाब से तो जनता खामेनेई से नफरत करती थी। अब इस महा-बयान पर ईरान भला चुप वैâसे रहता? अर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास ने ‘एक्स’ (ट्विटर) पर ट्रंप को सभ्यता और इतिहास का वह पाठ पढ़ा दिया, जो शायद उन्होंने स्कूल में छोड़ दिया था। दूतावास ने साफ कहा कि जिसके पास न ऐतिहासिक विरासत हो और न दूसरों के लिए सम्मान, वह भला आंसुओं की कीमत क्या जाने!
खैर, ९ जुलाई को मशहद में होने वाले सुपुर्द-ए-खाक कार्यक्रम में करोड़ों शिया मुसलमानों के जुटने से प्रशासन वैसे ही डरा हुआ है कि कहीं भगदड़ में ३,००० लोग न मर जाएं। ऊपर से ईरान को डर सता रहा है कि अमेरिका या इजरायल कोई ‘अमानुष’ हिमाकत न कर बैठें, इसलिए उन्होंने भी तीखे और विनाशकारी पलटवार की दो-टूक चेतावनी दे डाली है। कुल मिलाकर, जहां दुनिया एक गंभीर हादसे के कगार पर खड़ी है, वहां ट्रंप साहब अपनी ‘सुपरपावर वाली बवैâती’ से आंसुओं की इज्जत का जनाजा निकालने में व्यस्त हैं!
