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बरकाकाना पावर प्लांट में ओवर स्पीड हुई टरबाइन… जोरदार ब्लास्ट में तीन इंजीनियरों की मौत, एक की हालत गंभीर

अनिल मिश्र / रांची

झारखंड प्रदेश में रामगढ़ जिले के बरकाकाना ओपी क्षेत्र के हेहल स्थित मां छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात पावर प्लांट में कल शुक्रवार की देर रात जोरदार ब्लास्ट हो गया।इस ब्लास्ट के कारण तीन इंजीनियरों की मौत हो गई, जबकि एक इंजीनियर गंभीर रूप से घायल है। वहीं इस घटना के बाद फैक्टरी परिसर में अफरा-तफरी मच गई। इसके साथ के बाद बरकाकाना थाना प्रभारी उमाशंकर वर्मा मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सभी प्रोटेक्शन सिस्टम फेल होने और टर्बाइन के ओवरस्पीड होने के बाद जोरदार ब्लास्ट होने की बात सामने आ रही है। हादसे में जागेश्वर विहार बोकारो के विनीत महतो, धनबाद के संजीव केसरी, और नगर उंटारी गढ़वा के अभिषेक पांडेय की मौत होने की सूचना है।वहीं हजारीबाग के तरुण रवानी गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस बीच इस प्लांट में कार्यरत कर्मचारी अमित कुमार ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि पावर प्लांट का कंट्रोल रूम पहले ही अधिक तापमान होने का संकेत दे रहा था। वहां एसी खराब होने के कारण काम करना भी मुश्किल हो गया था। कर्मचारियों की ओर से कई बार प्रबंधन को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन किसी प्रकार से प्रबंधन के द्वारा एक्शन नहीं लिया गया, ना ही कूलिंग व्यवस्था को दुरुस्त किया गया।वहीं, हादसे से आक्रोशित लोगों ने शनिवार को रामगढ़ पतरातु मार्ग को जाम कर दिया। पुलिस और प्रबंधन मुआवजे को लेकर आक्रोशित लोगों से बात कर रहे हैं। समाचार लिखे जाने तक जाम हटाया जाने की खबर नहीं है।इस बीच प्रदर्शनकारी रामगढ़ उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को मौके पर बुलाने की मांग पर भी अड़े रहे। धरने में विधायक रोशन लाल चौधरी, भाजपा जिला अध्यक्ष संजीव बाबला, आजसू जिला अध्यक्ष दिलीप दांगी, जेएलकेएम के केंद्रीय महासचिव विजय साहू और माले नेता हीरा गोप सहित कई जनप्रतिनिधि, ग्रामीण, मजदूर और मृतकों के परिजन शामिल हुए।विधायक रोशन लाल चौधरी ने प्रथम दृष्टया फैक्ट्री प्रबंधन की कथित लापरवाही पर सवाल उठाते हुए मृतकों के परिवारों को डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने छोटे बच्चों वाले परिवारों के भरण-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी भी प्रबंधन द्वारा उठाए जाने की बात कही। उन्होंने हादसे की निष्पक्ष जांच के साथ रामगढ़ जिले की सभी औद्योगिक इकाइयों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। विधायक ने सुरक्षा मानकों, श्रम कानून, प्रदूषण नियंत्रण, अग्नि सुरक्षा, तकनीकी व्यवस्था और फैक्ट्रियों को जारी एनओसी की प्रक्रिया की जांच पर भी जोर दिया।उन्होंने कहा कि यदि जांच में प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, सरकारी विभागों के निरीक्षण में लापरवाही या खानापूर्ति सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।इस हादसे के बाद मजदूरों और स्थानीय लोगों में औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी है। लोगों ने मांग की है कि फैक्ट्रियों में नियमित तकनीकी जांच, उपकरणों का समय पर रखरखाव, आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।फिलहाल हादसे के वास्तविक कारण, संभावित सुरक्षा चूक, मृतकों के आश्रितों को मुआवजा और नौकरी तथा घायल इंजीनियर के इलाज को लेकर प्रशासन एवं प्रबंधन के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं। समाचार लिखे जाने तक प्रशासन और मृतकों के आश्रितों के बीच वार्ता जारी है।

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