अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति सलाहकार जेक ब्रौन एक मीडिया हाउस को दिए एक साक्षात्कार में अमेरिका को ईरान की ओर से होने वाले संभावित साइबर हमलों के प्रति गंभीर चेतावनी दी है। ब्रौन के अनुसार, अमेरिका को इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए कि भविष्य में साइबर हमलों की तीव्रता और गंभीरता अत्यधिक बढ़ सकती है।
पारंपरिक युद्ध से परे साइबर युद्ध
साइबर विशेषज्ञ अलेक्जेंडर लेस्ली और जेक ब्रौन का मानना है कि वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान अमेरिका की सीधी सैन्य क्षमता का मुकाबला पारंपरिक हथियारों से तो नहीं कर सकता, लेकिन साइबर हमलों के जरिए वह अमेरिकी इंप्रâास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। ब्रौन ने कहा, ‘साइबर अब किसी संघर्ष का सहायक हिस्सा नहीं रहा, बल्कि यह सीधे तौर पर आधुनिक युद्धक्षेत्र का मुख्य हिस्सा बन चुका है।’
अतीत के हमलों का अनुभव
जो बाइडन प्रशासन के दौरान राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति की देखरेख करने वाले जेक ब्रौन ने ध्यान दिलाया कि ईरान का अमेरिकी बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने का एक पुराना इतिहास रहा है।
-जल और ऊर्जा ढांचा: पेंसिल्वेनिया (पिट्सबर्ग) के वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और तेल रिफाइनरियों पर पूर्व में हमले।
-वित्तीय और स्वास्थ्य प्रणाली: अमेरिकी बैंकिंग नेटवर्क और स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों में सेंध लगाने का प्रयास।
-चुनावों में हस्तक्षेप: चुनाव चक्र के दौरान भ्रामक सूचनाएं और गलत जानकारी पैâलाना।
क्यों बढ़ सकता है जोखिम?
विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि हाल के दिनों में ईरानी हैकिंग समूहों द्वारा कोई व्यापक हमला नहीं देखा गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि खतरा टल गया है। ईरान केवल यह साबित करना चाहता है कि अमेरिका उस पर बिना किसी परिणाम के हमला नहीं कर सकता और वह अमेरिकी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को उजागर करने की ताक में है।
जेक ब्रौन और अन्य साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने अमेरिकी सरकार, वित्तीय संस्थानों, जल आपूर्ति और ऊर्जा नेटवर्क जैसे महत्वपूर्ण ढांचों का संचालन करने वाली एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने का सुझाव दिया है। उनका स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षा एजेंसियों को केवल छोटे-मोटे हैक्टिविस्ट हमलों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, बल्कि आने वाले समय में ईरान से होने वाले जटिल और बड़े साइबर जवाबी हमलों के लिए पूरी तैयारी रखनी चाहिए।
