मुख्यपृष्ठनए समाचारदुरुपयोग नहीं ज्ञानवर्धन के लिए करें एआई का उपयोग-प्रदीप कुमार

दुरुपयोग नहीं ज्ञानवर्धन के लिए करें एआई का उपयोग-प्रदीप कुमार

-शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर संगोष्ठी

सामना संवाददाता / सुल्तानपुर

राणाप्रताप पीजी कालेज में आयोजित बाबू धनञ्जय सिंह स्मृति व्याख्यान माला के अंतर्गत “शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका” विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों, प्रशिक्षणार्थियों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत भाषण के साथ हुआ, जिसमें उपप्राचार्य प्रो. निशा सिंह ने अतिथियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही है, किंतु इसके उपयोग में संतुलन और विवेक आवश्यक है। प्रस्ताविकी एवं उद्बोधन प्राचार्य प्रो. डी. के. त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने शिक्षा को ज्ञानार्जन के साथ-साथ व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया बताते हुए कहा कि तकनीक का समुचित उपयोग ही शिक्षा को प्रभावी बना सकता है। भविष्य एआई का है। इसलिए इससे जुड़कर अपनी उपयोगिता बढ़ाये। मुख्य वक्ता के रूप में केएनआईटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रदीप कुमार ने विषय पर गहन एवं विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा को अधिक सुलभ, रोचक और प्रभावी बना रही है। ए आई आधारित उपकरण विद्यार्थियों को व्यक्तिगत सीखने का अवसर प्रदान करते हैं, जिससे उनकी समझ और दक्षता में वृद्धि होती है। एआई ज्ञान दे सकता है, लेकिन शिक्षक जीवन का मार्गदर्शन करता है।साथ ही उन्होंने चेताया कि एआई का उपयोग केवल ज्ञानवर्धन के लिए किया जाना चाहिए, इसके दुरुपयोग से बचना आवश्यक है।मुख्य वक्ता डॉ प्रदीप कुमार ने जिज्ञासा प्रश्नोत्तरी के अंतर्गत डॉ शिशिर श्रीवास्तव, डॉ आलोक पाण्डेय और बी एड़ प्रथम वर्ष की छात्रा प्रिया सरोज के प्रश्नों का समाधान भी किया। प्रबंधक बाल चंद्र सिंह ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि आधुनिक युग में तकनीक से जुड़ना समय की आवश्यकता है, परंतु इसके सुरक्षित एवं नैतिक उपयोग पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बाबू धनञ्जय सिंह स्मृति व्याख्यान माला के समन्वयक डॉ. आलोक पाण्डेय ने कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियाँ विद्यार्थियों को नवीनतम ज्ञान से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।
संगोष्ठी का सफल संचालन डॉ. संतोष ‘अंश’ द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संचालन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता ज्ञान का विस्तार तो करती है, किंतु शिक्षक का स्थान सदैव मार्गदर्शक के रूप में सर्वोपरि रहेगा। एआई शिक्षक का विकल्प नहीं संकल्प होना चाहिए।अंत में बी.एड. विभागाध्यक्ष डॉ. भारती सिंह ने आभार ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। सरस्वती वंदना रुचि श्रीवास्तव एवं मानसी पाण्डेय ने प्रस्तुत किया। स्वागत गीत श्वेता मिश्रा ने गाया। इस अवसर पर प्रो शैलेन्द्र प्रताप सिंह, प्रो धीरेंद्र कुमार, डॉ रंजना पटेल,प्रो सुनील त्रिपाठी, डॉ महमूद आलम, डॉ आलोक कुमार, डॉ सुनील त्रिपाठी,डॉ नीतू सिंह, डॉ बीना सिंह, डॉ प्रदीप कुमार सिंह,डॉ शिशिर श्रीवास्तव, शांतिलता कुमारी, डॉ सीमा सिंह, डॉ यशमंत सिंह,डॉ विपिन शर्मा, यशस्वी प्रताप सिंह, शालिनी पाण्डेय, प्रमोद श्रीवास्तव के साथ महाविद्यालय के शिक्षकगण, बी.एड. के प्रशिक्षणार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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