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राम के नाम पर वोट, मंदिर के नाम पर नोट, भाजपा बताए आस्था का हिसाब कब देगी : कांग्रेस

भगवान के नाम पर राजनीति, चंदे पर चुप्पी और विवादों पर पर्दा क्या यही भाजपा का ‘रामराज्य’ है?

अनिल मिश्र / रांची

भगवान श्रीराम के नाम पर सत्ता तक पहुंचने वाली भारतीय जनता पार्टी आज करोडों रामभक्तों के सबसे बडे सवालों से बच रही है। देश जानना चाहता है कि भगवान श्रीराम के नाम पर जुटाए गए हजारों करोड रुपये के चंदे का पूरा और पारदर्शी हिसाब जनता के सामने कब रखा जाएगा। यह बातें झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने कही।

उन्होंने कहा कि जो सरकार गरीब के बैंक खाते, किसान की सब्सिडी, छोटे दुकानदार के लेन-देन और आम नागरिक के प्रत्येक रुपये का हिसाब मांगती है, वही सरकार राम मंदिर निर्माण से जुडे चंदे की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों पर मौन क्यों है? यदि सरकार और संबंधित संस्थाओं के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो स्वतंत्र ऑडिट और सार्वजनिक लेखा-जोखा से परहेज क्यों किया जा रहा है?

नायक ने कहा कि अयोध्या भूमि खरीद विवाद को लेकर गंभीर आरोप सामने आए, जिनमें कुछ ही मिनटों में जमीन की कीमतों में असामान्य वृद्धि के दस्तावेज सार्वजनिक हुए। देश ने इन मामलों पर जवाब मांगा, लेकिन आज तक ऐसी कोई पारदर्शी प्रक्रिया सामने नहीं आई, जिससे करोडों श्रद्धालुओं के मन में उठे संदेह पूरी तरह दूर हो सकें।

उन्होंने कहा कि उज्जैन के महाकाल लोक कोरिडोर का भव्य उद्घाटन होने के कुछ ही महीनों बाद मूर्तियों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता और परियोजना प्रबंधन पर गंभीर सवाल खडे किए। इसी प्रकार केदारनाथ धाम में सोना मढाई विवाद, तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद की गुणवत्ता पर उठे प्रश्न, काशी विश्वनाथ धाम परियोजना में प्राचीन धार्मिक संरचनाओं के संरक्षण को लेकर विवाद, पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार और परिक्रमा परियोजना से जुडे मुद्दों तथा चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना पर पर्यावरण एवं सुरक्षा संबंधी चिंताओं ने भी श्रद्धालुओं के मन में अनेक प्रश्न खडे किए हैं।

विजय शंकर नायक ने भाजपा से तीन सीधे सवाल पूछे। पहला, राम मंदिर निर्माण से जुडे चंदे का स्वतंत्र और सार्वजनिक ऑडिट आज तक क्यों नहीं कराया गया? दूसरा, धार्मिक परियोजनाओं में उठे गंभीर आरोपों और विवादों की निष्पक्ष तथा पारदर्शी जांच से परहेज क्यों किया जा रहा है? तीसरा, आस्था के नाम पर सवाल पूछने वाले श्रद्धालुओं और नागरिकों को कटघरे में खडा करने की प्रवृत्ति क्यों अपनाई जा रही है?

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम सत्य, मर्यादा, न्याय और पारदर्शिता के प्रतीक हैं। इसलिए उनके नाम पर राजनीति करने वालों को भी उन्हीं मूल्यों का पालन करना चाहिए। भगवान के नाम का उपयोग जवाबदेही से बचने का माध्यम नहीं बन सकता। आज देश की जनता को मंदिर-मस्जिद, भावनात्मक नारों और धार्मिक ध्रुवीकरण में उलझाकर बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद से मांग की कि यदि उन्हें अपनी व्यवस्था और नीयत पर भरोसा है तो राम मंदिर निर्माण से जुडे चंदे, प्रमुख धार्मिक ट्रस्टों तथा बडी धार्मिक परियोजनाओं का स्वतंत्र ऑडिट कराकर पूरा विवरण देश के सामने सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा कि देश का सनातनी समाज आस्था का सम्मान चाहता है, आस्था के नाम पर राजनीति नहीं; पारदर्शिता चाहता है, प्रचार नहीं; जवाबदेही चाहता है, जुमले नहीं।

वहीं, श्रीराम मंदिर चढावा चोरी उजागर करो संघर्ष समिति के संयोजक प्रो. विजय कुमार मिठ्ठू ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता गया जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रजनीश कुमार झुना ने की। कार्यक्रम को पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, डॉ. गगन मिश्रा, मुरारी प्रसाद, खिजीर हयात, बाबूलाल प्रसाद सिंह, शशि किशोर शिशु, राम प्रमोद सिंह, युगल किशोर सिंह, जिला पार्षद सुमंत कुमार, विद्या शर्मा, अमित कुमार सिंह उर्फ रिंकू सिंह, टिंकू गिरी, धर्मेंद्र कुमार निराला, सुनील कुमार पासवान, प्रदीप शर्मा, राजीव कुमार उर्फ लबी सिंह, अर्जुन प्रसाद, शिव कुमार चौरसिया, ओंकार शक्ति, चंदन कुशवाहा, कुमार गौरव, अभिषेक शर्मा, शिवनाथ प्रसाद सहित अन्य नेताओं ने संबोधित किया।

नेताओं ने छह प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि योगी सरकार कथित मामले की एसआईटी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करे, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग किया जाए, चमपत राय एवं अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए, शुरुआत से प्राप्त समस्त चढावे का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए, मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में हो तथा प्रधानमंत्री अपनी चुप्पी तोडते हुए श्रद्धालुओं से माफी मांगें।

उन्होंने बताया कि आंदोलन के दो चरण पूरे होने के बाद अब तीसरे चरण में गया जिले के सभी 24 प्रखंडों, 332 ग्राम पंचायतों तथा गांव-गांव और मुहल्लों में जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद गयाजी से अयोध्या तक चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। कार्यक्रम के समापन पर महामहिम राष्ट्रपति के नाम छह सूत्री ज्ञापन ईमेल, ट्वीट तथा डाक के माध्यम से भेजा गया।

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