अनिल मिश्र / पटना
जहां पूरे देश में मानसून की बारिश ने दस्तक दे दी है, वहीं बिहार की राजधानी पटना में बरसात के बीच राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह राजधानी की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव है। इस चुनाव में कई राजनीतिक दलों के पूर्व चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है।
बांकीपुर उपचुनाव को लेकर महागठबंधन के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के बीच सीट को लेकर खींचतान तेज हो गई है। पहले कांग्रेस के कुछ नेताओं की ओर से जन सुराज को समर्थन देने की चर्चा थी, लेकिन अब कांग्रेस ने खुद इस सीट पर दावा ठोक दिया है। दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल ने बिना देर किए रेखा गुप्ता को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इसकी घोषणा प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने की।
उधर भारतीय जनता पार्टी भी इस प्रतिष्ठापूर्ण सीट पर उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन कर रही है। पार्टी इस चुनाव को पूरी गंभीरता से ले रही है। भाजपा की ओर से अजय आलोक, रणवीर नंदन और नील रतन घोष के नाम प्रमुख दावेदारों में बताए जा रहे हैं। हालांकि अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व और नितिन नवीन की सहमति से लिया जाएगा।
गौरतलब है कि बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने और विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद रिक्त हुई है। यह सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है और 1990 के दशक से यहां पार्टी का प्रभाव कायम है।
बांकीपुर उपचुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है। नामांकन की प्रक्रिया 6 जुलाई से शुरू हो गई है। नामांकन की अंतिम तिथि 13 जुलाई, नाम वापसी की अंतिम तिथि 16 जुलाई निर्धारित की गई है। मतदान 30 जुलाई को होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को होगी।
इस बार का चुनाव कई कारणों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा अपने परंपरागत गढ़ को बचाने की चुनौती का सामना कर रही है। महागठबंधन के भीतर सीट को लेकर पैदा हुई खींचतान ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
अब सबकी नजरें 30 जुलाई को होने वाले मतदान और 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। यह उपचुनाव तय करेगा कि बिहार में भाजपा के प्रदेश नेतृत्व की कमान संभाल रहे सम्राट चौधरी अपनी राजनीतिक पकड़ कितनी मजबूत बनाए रखते हैं या फिर प्रशांत किशोर का जन सुराज बिहार की राजनीति में नई जमीन तैयार करने में सफल होता है। साथ ही यह चुनाव कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल की राजनीतिक स्वीकार्यता की भी महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है।
