मनमोहन सिंह
…और पत्रकार को गरियाते हुए निकल गए ट्रंप
‘मैं यह इंटरव्यू यहीं खत्म कर रहा हूं। आपके पास कोई निष्पक्षता नहीं है और आप सिर्फ झूठे दावों को बढ़ावा दे रही हैं।’ एनबीसी न्यूज की एंकर क्रिस्टन वेल्कर पर इस तरह चिल्लाते हुए और उन्हें (स्टूपिड) मूर्ख और (क्रुक्ड) धोखेबाज कहते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का लाइव शो ‘मीट द प्रेस’ से बीच में ही उठकर चले जाना कोई अनपेक्षित घटना नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों के नजरिए से यह ट्रंप की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति और उनके चिरपरिचित व्यवहार का हिस्सा है।
आईए जानने की कोशिश करते हैं कि ट्रंप ऐसा क्यों करते हैं?
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप का मीडिया से टकराना और आक्रामक रुख अपनाना उनकी एंटी-एस्टेब्लिशमेंट यानी व्यवस्था-विरोधी राजनीति का मूल आधार है। ट्रंप अपने समर्थकों को यह दिखाना चाहते हैं कि मेनस्ट्रीम का मीडिया उनके और उनकी नीतियों के खिलाफ है। जब वे किसी पत्रकार को धोखेबाज या मूर्ख कहते हैं, तो उनके समर्थक इसे कमजोरी नहीं, बल्कि मीडिया के खिलाफ एक योद्धा का साहस मानते हैं। इसके अलावा, जब पत्रकार उनसे किसी नीतिगत विफलता या दावों के ठोस सबूत मांगते हैं, तो सबूत न होने की स्थिति में वे सीधे मीडिया की निष्पक्षता पर ही हमला कर देते हैं। इससे मुख्य मुद्दा पीछे छूट जाता है और पूरी बहस ट्रंप बनाम मीडिया पर केंद्रित हो जाती है। ट्रंप इंटरव्यू अपनी शर्तों पर चलाना चाहते हैं। जब उन्हें लगता है कि पत्रकार नैरेटिव को अपने हाथ में ले रहा है, तो वे वॉकआउट करके सुर्खियां खुद बटोर लेते हैं।
कोई नई बात नहीं
क्रिस्टन वेल्कर के साथ हुई यह घटना ट्रंप के पुराने व्यवहार का ही दोहराव है। मीडिया के साथ उनके तीखे टकरावों का एक लंबा इतिहास रहा है। राष्ट्रपति चुनाव २०२० से ठीक पहले ट्रंप ने सीबीएस न्यूज की दिग्गज पत्रकार लेस्ली स्टाल को दिया ‘६० मिनट्स’ का इंटरव्यू बीच में ही छोड़ दिया था क्योंकि वे इस बात से नाराज थे कि स्टाल उनसे कठिन और तीखे सवाल पूछ रही थीं। इसी तरह, साल २०१८ में व्हाइट हाउस की एक प्रेस कॉन्प्रâेंस के दौरान सीएनएन के पत्रकार जिम एकोस्टा ने जब अप्रवासियों को लेकर तीखे सवाल पूछे, तो ट्रंप ने उन्हें क्रूर और बुरा व्यक्ति कहा था और उनका प्रेस पास भी सस्पेंड करवा दिया था। इससे पहले २०१५ में रिपब्लिकन प्राइमरी डिबेट के दौरान जब फॉक्स न्यूज की मेगिन केली ने ट्रंप द्वारा महिलाओं के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा पर सवाल उठाया, तो ट्रंप उन पर बुरी तरह भड़क गए थे।
विक्टिम कार्ड
इस प्रकार की हरकतों के जरिए ट्रंप अपने मतदाताओं और विरोधियों को दो स्पष्ट संदेश देते हैं। पहला संदेश यह है कि वे कभी झुकते नहीं हैं। वे दिखाना चाहते हैं कि वे किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे, चाहे वह देश का सबसे बड़ा न्यूज नेटवर्क ही क्यों न हो। दूसरा संदेश यह है कि मीडिया पक्षपाती है। वे अपनी जनता के मन में यह बात पूरी तरह बिठा देना चाहते हैं कि मुख्यधारा की खबरें फेक न्यूज हैं, ताकि उनके खिलाफ आने वाली कोई भी नकारात्मक खबर बेअसर हो जाए।
किस बात से है चिढ़?
ट्रंप के व्यवहार का विश्लेषण करने पर यह साफ है कि वे कुछ खास चीजों से बुरी तरह चिढ़ते हैं। वे मुख्य रूप से तथ्य और सबूतों की मांग से परेशान होते हैं। ट्रंप जब भी चुनावी धांधली या अपनी अन्य नीतियों पर कोई बड़ा दावा करते हैं और पत्रकार उनसे ठोस सबूत या दस्तावेज मांगते हैं, तो वे असहज हो जाते हैं। इसके साथ ही, अपनी हार या विफलता का जिक्र सुनना भी उन्हें पसंद नहीं है। २०२० के चुनाव की हार या अदालतों द्वारा उनके दावों को खारिज किए जाने की बात याद दिलाना उन्हें सबसे ज्यादा नाराज करता है।
रिचर्ड निक्सन बोले पत्रकार दुश्मन!
हालांकि, अमेरिकी इतिहास में मीडिया और राष्ट्रपतियों के बीच तनाव हमेशा रहा है, लेकिन ट्रंप का तरीका सबसे अलग और सीधा है। वॉटरगेट घोटाले के दौरान रिचर्ड निक्सन मीडिया से बेहद नफरत करते थे। उन्होंने पत्रकारों को दुश्मन तक कहा था और अपनी एक एनिमी लिस्ट बनाई थी। हालांकि, वे सार्वजनिक रूप से ऑन-वैâमरा इंटरव्यू इस तरह बीच में छोड़कर नहीं भागते थे। थॉमस जेफरसन और अब्राहम लिंकन जैसे राष्ट्रपतियों ने भी अपने दौर के अखबारों की तीखी आलोचना की थी, लेकिन तब संवाद का माध्यम आज की तरह लाइव टेलीविजन या सोशल मीडिया नहीं था।
निष्कर्ष के तौर पर, पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों ने मीडिया से अपनी नाराजगी पत्रों, बयानों या चुनिंदा पत्रकारों को नजरअंदाज करके दिखाई, लेकिन वैâमरे के सामने लाइव इंटरव्यू के दौरान पत्रकारों को व्यक्तिगत रूप से अपमानित करना और वॉकआउट करना विशुद्ध रूप से ट्रंप की अपनी अनूठी और आक्रामक राजनीतिक शैली है।
