मुख्यपृष्ठधर्म विशेषयमलोक से क्यों वापस आती है आत्मा?

यमलोक से क्यों वापस आती है आत्मा?

शीतल अवस्थी

मृत्यु एक ऐसा सच है, जिसे कोई भी झुठला नहीं सकता। हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद स्वर्ग-नरक की मान्यता भी है। पुराणों के अनुसार, जो मनुष्य अच्छे कर्म करता है, उसके प्राण हरने देवदूत आते हैं और उसे स्वर्ग ले जाते हैं, जबकि जो मनुष्य जीवन भर बुरे कामों में लगा रहता है, उसके प्राण हरने यमदूत आते हैं और उसे नरक में ले जाते हैं। लेकिन उसके पहले उस जीवात्मा को यमलोक ले जाया जाता है, जहां यमराज उसके पापों के आधार पर उसे सजा देते हैं।
मृत्यु के बाद जीवात्मा यमलोक तक किस प्रकार जाती है, इसका विस्तृत वर्णन गरुड़ पुराण में बताया गया है। गरुड़ पुराण में यह भी बताया गया है कि किस प्रकार मनुष्य के प्राण निकलते हैं और किस तरह वह प्राण पिंडदान प्राप्त कर प्रेत का रूप लेते हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार, जिस मनुष्य की मृत्यु होने वाली होती है, वह बोलने की इच्छा होने पर भी बोल नहीं पाता है। अंत समय में उसमें दिव्यदृष्टि उत्पन्न होती है और वह संपूर्ण संसार को एकरूप समझने लगता है। उसकी सभी इंद्रियां नष्ट हो जाती हैं और वह जड़ अवस्था में हो जाता है, यानी हिलने-डुलने में असमर्थ हो जाता है। इसके बाद उसके मुंह से झाग निकलने लगते हैं और लार टपकने लगती है।
पापी पुरुष के प्राण नीचे के मार्ग से निकलते हैं। उस समय दो यमदूत आते हैं। वे बड़े भयानक व क्रोधयुक्त नेत्र वाले तथा पाशदंड को धारण करने वाले नग्न अवस्था में रहते हैं। वे अपने दांतों से कट-कट शब्द करते हैं। यमदूतों के कौए जैसे काले बाल होते हैं, उनका मुंह टेढ़ा-मेढ़ा होता है, नाखून ही उनके शस्त्र होते हैं। ऐसे यमराज के दूतों को देखकर प्राणी भयभीत होकर मल-मूत्र त्याग करने लगता है। उस समय शरीर से अंगुष्ठमात्र (अंगूठे के बराबर) जीव “हा-हा” शब्द करता हुआ निकलता है, जिसे यमदूत पकड़ लेते हैं।
यमराज के दूत उस भोगने वाले शरीर को पकड़कर पाश गले में बांधकर उसी क्षण यमलोक को ले जाते हैं, जैसे राजा के सैनिक दंडनीय प्राणी को पकड़कर ले जाते हैं। उस पापी जीवात्मा को रास्ते में थकने पर भी यमराज के दूत भयभीत करते हैं और उसको नरक के दुख को बार-बार सुनाते हैं।
यमदूतों की ऐसी भयानक बातें सुनकर पापात्मा जोर-जोर से रोने लगती है, किंतु यमदूत उस पर बिल्कुल भी दया नहीं करते हैं। इसके बाद वह अंगूठे के बराबर भोगने वाला शरीर यमदूतों से डरता और कांपता हुआ, कुत्तों के काटने से दुखी होकर अपने किए हुए पापों को याद करते हुए चलता है। आग की तरह गर्म हवा तथा गर्म बालू पर वह जीव चल नहीं पाता है और वह भूख-प्यास से भी व्याकुल हो उठता है। तब यमदूत उसकी पीठ पर चाबुक मारते हुए उसे आगे ले जाते हैं। वह जीव जगह-जगह गिरता है और बेहोश हो जाता है, फिर उठकर चलने लगता है। इस प्रकार यमदूत उस पापी को अंधकाररूप मार्ग से यमलोक ले जाते हैं।

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