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खजाना खाली, अब पार्टिसिपेट’ के सहारे मनपा बेचारी… ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ में सीएम बोले, अब आप ही फंड दे दो यार!.. कंपनियों से सीएम लगा रहे गुहार

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी बनाने का दावा करने वाली महायुति सरकार के सामने अब अपनी ही आर्थिक प्राथमिकताओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुंबई मनपा के विकास कार्यों में अब सरकार और मनपा को निजी कंपनियों, सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों की भागीदारी की जरूरत पड़ रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ पहल का शुभारंभ किया, जिसके माध्यम से कंपनियों और संस्थाओं को मनपा की ४५० से अधिक नागरिक परियोजनाओं से जुड़ने का आग्रह किया।
इस पहल के तहत मनपा के स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण से जुड़े कामों के लिए कंपनियों और सामाजिक संस्थाओं से सहयोग मांगा गया। राजनीतिक जानकारों के अनुसार मुंबई जैसी देश की सबसे समृद्ध मनपा को अपने विकास कार्यों के लिए निजी कंपनियों के दरवाजे पर क्यों जाना पड़ रहा है। वर्षों से मनपा के पास विशाल बजट और भारी राजस्व होने के बावजूद अब नागरिक सुविधाओं के लिए कंपनियों की मदद लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है। यह स्थिति क्यों आई है।

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