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महिला सशक्तीकरण की खुली पोल… मुंबई में १९ साल से कम उम्र की ७१६ लड़कियों ने कराया गर्भपात!.. आरटीआई के जवाब में हुआ खुलासा

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई में कम उम्र की लड़कियों में गर्भपात के बढ़ते मामलों को लेकर मनपा द्वारा जारी किए गए आंकड़ों ने मुंबईकरों को चिंता में डाल दिया है। आरटीआई के तहत मिली जानकारी के मुताबिक, अप्रैल २०२४ से मार्च २०२५ के बीच मुंबई में १९ साल से कम उम्र की ७१६ लड़कियों के अबॉर्शन रिकॉर्ड किए गए। आरटीआई के तहत मिली इस जानकारी ने महायुति सरकार के ‘महिला सशक्तीकरण’ के दावों की पोल खोल दी है।
आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, साल भर में कुल २०,९५० मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी प्रोसीजर रिकॉर्ड किए गए, जिसमें गर्भनिरोधक का फेल होना या ठीक से इस्तेमाल न करना सबसे आम वजह रही। यह जानकारी एक्टिविस्ट चेतन कोठारी की आरटीआई एप्लीकेशन के जवाब में दी गई है। इसमें शहर में अबॉर्शन, मां की मौत व अबॉर्शन से जुड़ी मौतों की जानकारी मांगी गई थी।
कॉन्ट्रासेप्टिव फेलियर जिम्मेदार
डेटा से पता चलता है कि ज्यादातर अबॉर्शन के लिए कॉन्ट्रासेप्टिव फेलियर या कॉन्ट्रासेप्टिव तरीकों का ठीक से इस्तेमाल न होना जिम्मेदार है। जिन २०,६८५ मामलों के कारण रिकॉर्ड किए गए, उनमें से १९,४९५ कॉन्ट्रासेप्शन के गलत या ठीक से इस्तेमाल न होने या कॉन्ट्रासेप्टिव तरीकों के फेलियर को जिम्मेदार ठहराया गया है।
वर्ष २०२४-२५ में ७,२९६ अबॉर्शन
आरटीआई के मुताबिक, २५-२९ साल की उम्र की महिलाओं में सबसे ज्यादा अबॉर्शन हुए। २०२४-२५ के दौरान ७,२९६ मामले दर्ज किए गए। इसके बाद ३०-३४ साल की महिलाओं का स्थान था, जिनमें ५,६७३ अबॉर्शन रिपोर्ट किए गए। २०-२४ साल की उम्र की महिलाओं में ३,३१४ मामले दर्ज किए गए, जबकि १९ साल से कम उम्र की लड़कियों में ७१६ अबॉर्शन दर्ज किए गए।

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