मुख्यपृष्ठनए समाचारवाह रे महायुति सरकार...विकास के नाम पर अब बिकेगा मैदान!

वाह रे महायुति सरकार…विकास के नाम पर अब बिकेगा मैदान!

-बिल्डरों को जमीन  सौंपने की रची साजिश

-३० फीसदी जगह में  बनेगा ५ स्टार होटल

रामदिनेश यादव / मुंबई

विकास के नाम पर मुंबई को बेचने की साजिश रची जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि यह भाजपा नेतृत्व वाली महायुति सरकार सब कुछ बेचने निकली है। मुंबई ही नहीं, राज्य में जहां भी खुली जगह है, सरकार बस उसे निजी बिल्डरों के हाथों में देने का बहाना ढूंढती है। अब इस सरकार ने राज्य में बच्चों को खेलने के लिए खुले मैदानों को बेचने की साजिश रची है। इन जगहों पर ३० प्रतिशत भूखंड विकास के नाम पर व्यावसायिकों की झोली में डालने जा रही है। ऐसे में मुंबई के ओवल मैदान, आजाद मैदान, क्रॉस मैदान, शिवाजी पार्क सहित तमाम बड़े खेल मैदानों की जगह बेचने की तैयारी कर ली है। खेलने के लिए सिर्फ ७० प्रतिशत जगह ही बचेगी।
बता दें कि राज्य में आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए सरकार ने विकास नियंत्रण नियमावली में बदलाव करते हुए बड़े मैदानों के उपयोग को लेकर यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस पैâसले के तहत अब चुनिंदा बड़े खेल मैदानों के एक हिस्से में पंचतारांकित होटल, मॉल और व्यावसायिक परिसरों के निर्माण की अनुमति दी जाएगी। इस पैâसले के बाद शहरी क्षेत्रों में पहले से ही कम होती खुली जगहों को लेकर चिंता और गहरी हो गई है। बड़े शहरों में बच्चों के खेलने के लिए पर्याप्त मैदान नहीं होने की शिकायत पहले से ही उठती रही है। ऐसे में मैदानों के एक हिस्से को व्यावसायिक उपयोग के लिए खोलने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विपक्ष आक्रामक
विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता सचिन सावंत का कहना है कि भले ही ७० प्रतिशत मैदान संरक्षित रखने की बात कही जा रही है, लेकिन ३० प्रतिशत हिस्से में होटल और मॉल बनने के बाद आम नागरिकों और बच्चों की पहुंच पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंध लग सकता है। सुरक्षा और निजी प्रबंधन के कारण मैदानों का खुला स्वरूप भी बड़ा में छीन लिया जाएगा।
व्यावसायिक निर्माण की इजाजत
सरकार के नियम के अनुसार आजाद मैदान, ओवल मैदान जैसे क्षेत्रों में १२ एकड़ या उससे अधिक के मैदानों के ३० प्रतिशक्त हिस्से में निर्माण की अनुमति होगी। जबकि राज्य के अन्य हिस्सों में २५ एकड़ से बड़े मैदानों में इसी प्रकार के व्यावसायिक निर्माण की इजाजत दी जाएगी।

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