डॉ रवीन्द्र कुमार
पहले पहल जब भारत में रेल चलना शुरू हुई, तब क्या अधिकारी क्या सुपरवाइज़र सभी अंग्रेज़ ही होते थे। धीरे-धीरे रेल नेटवर्क के विस्तार के साथ इसमें एंग्लो इंडियंस और पारसियों को जगह मिलनी शुरू हुई। इसका एक बड़ा कारण था उनकी अँग्रेजी भाषा पर अपेक्षाकृत बेहतर पकड़ और उनका अँग्रेजी रहन-सहन। लेकिन वे थे कर्मचारी स्तर पर ही। यथा टी.टी., गार्ड, ए.एस.एम. इंजन ड्राइवर आदि। प्रसिद्ध लेखक रस्किन बॉन्ड ने अपने एक चाचा का ज़िक्र किया है जो दिल्ली स्टेशन के स्टेशन मास्टर हुआ करते थे।
यदि आप साहित्य के फ़लक पर देखेंगे तो पाएंगे क्या गीतकार शैलेन्द्र क्या गुलशन बावरा क्या आचार्य महावीर प्रसाद दिवेदी जिनके नाम से एक पूरा युग ही हिंदी साहित्य में दिवेदी युग कहलाता है. वे मध्य रेलवे, तब की जी.आई.पी. रेलवे में कार्यरत थे. अजमेर, बम्बई, नागपुर के अलावा वे झांसी डी.एस. ऑफिस ( डिस्ट्रिक्ट सुपरिटेंडेंट ) वर्तमान डी.आर.एम. ( डिवीजनल रेलवे मैनेजर) के कार्यालय में मुख्य लिपिक थे. सीनियर से अन-बन के कारण नौकरी छोड़ हिंदी की फुल टाइम सेवा में जुट गये।
दरअसल तब दो तीन ही विभाग थे जिसमें बम्पर नौकरियों की गुंजायश थी। एक मिलिटरी जिसमें जाने के नाम से ही परिवार में रोना-धोना शुरू हो जाता था दूसरे रेलवे और तीसरा डाक विभाग।
कुछ प्रमुख लोग जो भारतीय फिल्मी दुनिया और साहित्य को रेलवे की देन है:
1. बीना राय पिता पश्चिम रेलवे में स्टोर्स ऑफिसर (IRSS
2. शैलेंद्र माटुंगा रेलवे वर्क शॉप में मकेनिक (वैल्डर)
3. ओम पुरी पिता जालंधर में रेलवे के स्टोर्स विभाग में
4. डेविड पिता इंजन ड्राइवर
5. गिरीश कार्नाड बड़े भाई मध्य रेलवे में चीफ इंजीनियर (IRSE)
6. नूतन ससुर रेलवे में महाप्रबंधक/रेलवे स्टाफ कॉलेज के प्रथम प्रिंसिपल
7. वी शांताराम जी आई पी (मध्य रेल) में टी एक्स आर स्टाफ
8. ई. बिलीमोरिया जी आई पी (मध्य रेलवे) में फायरमैन
9. राज बब्बर पिता टूंडला (उत्तर रेलवे) में टी एक्स आर स्टाफ
10. गुलशन बावरा पश्चिम रेलवे मुंबई में गुड्स क्लर्क
11. बासु चटर्जी पिता रेलवे वर्कशॉप अजमेर में
12. शेख मुख्तार पिता रेलवे पुलिस में
13. विमल मित्रा ट्रेन कंट्रोलर दक्षिण पूर्व रेलवे में
14. वीना पिता रेलवे में
15. भप्पी सोनी पूर्व टिकट कलेक्टर
16. के पी सक्सेना कहानीकार, संवाद/स्क्रिप्ट लेखक स्टेशन अधीक्षक
17. शीला (मलयालम) पिता रेलवे में
18. सी रामचंद पिता मध्य रेलवे में स्टेशन मास्टर
19. ऋषिकेश मुखर्जी ससुर रेलवे में महाप्रन्धक (ए के मुखर्जी)
20. मौसमी चटर्जी पिता रेलवे में (कोलकाता)
21. के एल सहगल उत्तर रेलवे में टाइम कीपर
22. रंगनाथ (तेलुगू) चरित्र अभिनेता पूर्व रेलकर्मी टी.टी. विजयवाड़ा
23. रघुनाथ रेड्डी (तेलुगू) चरित्र अभिनेता पूर्व रेलकर्मी
24. बालचन्द्र मेनन निर्देशक पिता दक्षिण रेलवे में स्टेशन मास्टर
25. खराज मुखर्जी (बंगला अभिनेता) पूर्व रेलकर्मी
26. नागेश (तमिल अभिनेता) पूर्व रेलकर्मी
27. वीनू चक्रवर्ती (अभिनेता) पूर्व रेलकर्मी
28. अलेक्स (तमिल) गोल्डन रॉक वर्क शॉप के स्टोर्स विभाग में
29. विजयन निर्देशक (तमिल) गोल्डन रॉक वर्कशॉप
30. शिखा स्वरूप पिता उत्तर रेलवे के स्टोर्स विभाग में
31. जॉर्ज बेकर (असमिया/बंगला)अभिनेता उत्तर-सीमांत रेलवे में पी.डब्लू.आई.
32. सोहराब मोदी (पिता जयपुर/रतलाम/अलवर) में रेलवे इंजन ड्राइवर
33. नज़ीर हुसैन पिता रेलवे लखनऊ में गार्ड
34. राशिद खान वडोदरा स्टेशन पर
35. इंद्रजीत सिंह तुलसी (गीतकार) लॉ ऑफिसर पश्चिम रेलवे
36. आदेश श्रीवास्तव पिता जबलपुर में टी एक्स आर
37. मिलिंद सोमन पूर्व टिकट कलेक्टर
38. पलाश सेन पिता उत्तर रेलवे में डॉक्टर
39. उत्तम मोहंती(उडिया फिल्म) पिता खड़कपुर में गुड्स क्लर्क
40. सुमा (तेलुगू) पिता दक्षिण मध्य रेलवे में कार्यरत
41. बुद्ध देब दासगुप्ता (बंगला निर्देशक) पिता दक्षिण पूर्व रेलवे
42. सुरोजीत चटर्जी पूर्व अधिकारी दक्षिण पूर्व रेलवे
43. मालविका तिवारी पिता रेलवे अधिकारी
44. आयशा धारकर दादा रेलवे में अधिकारी ( IRAS)
45. नागभूषण (तेलुगू) गुंटकल में पूर्व बुकिंग क्लर्क
46. ज़रीना वहाब पिता राजमुन्दरी में गार्ड
47. महमूद जूनियर पिता पश्चिम रेलवे में
48. गजराज राव पिता उत्तर रेलवे में
49. लिलेट दूबे पिता गोविंद केसवानी रेलवे में इंजीनियर
50. डॉ जब्बार पटेल निर्देशक पिता दौंड में चीफ यार्ड मास्टर
51. शांता आप्टे पिता मध्य रेलवे के सोलापूर में स्टेशन मास्टर
52. राजीव मेनन फिल्म निर्माता भाई करुणाकर मेनन (IRAS) .
53. रलल्पलली नरसिम्हा राव दक्षिण मध्य रेलवे के स्टेटिक्स विभाग में 54. ऐरिका लाल (वक़्त फिल्म पर्दे पर ‘आगे भी जाने न तू’) पिता रेलवे में मकेनिकल ऑफिसर
55. प्रेम ऋषि अभिनेता ड्राइंग ऑफिस पश्चिम रेलवे मुंबई
( हो सकता है त्रुटिवश कुछ नाम आ गये/छूट गये हों, जिसके लिये खेद और क्षमा)
इसके अलावा क्या भगवती चरण वर्मा, क्या मुंशी प्रेम चंद क्या के पी सक्सेना इन लोगों ने भी भारतीय फिल्मों से किसी न किसी रूप जुड़ाव रखा है। के.पी. सक्सेना तो रेलवे से ही थे। जबकि मुंशी प्रेम चंद और भगवती चरण वर्मा की पुस्तकों पर फिल्म बनी। पंडित चंद्र धर शर्मा गुलेरी की ‘उसने कहा था’ पर भी फिल्म बनी।
हिन्दी फिल्मों मे यह आम दृश्य होता था जिसमें रेल किसी न किसी रूप मे अपनी मौजूदगी दर्ज़ कराती रही है। या तो हीरो खुद या कोई न कोई रेलवे मे कार्यरत दिखाया जाता था। नायक ट्रेन मे चढ़ रहा है या उतर रहा है या फिर हीरोइन साथ में ही यात्रा कर रही होती थी।
न जाने कितने ही गीत रेल मे, रेल के ऊपर, रेल के इंजन मे फिल्माए गए। किसी दुखियारे या दुखियारी को ख़ुदकुशी करनी हो तो रेल, विलेन की मनपसंद जगह रेल की पटरी होती थी जहां वह किसी न किसी को पटरी से बांध देता था।
कितनी ही फिल्मों के टाइटल तक रेलवे के इर्द गिर्द घूमते हैं मसलन फ़्रंटियर मेल, पंजाब मेल, तूफान मेल। रेलवे प्लेटफॉर्म, बनिंग ट्रेन, चेन्नई एक्स्प्रेस, एक चालीस की लास्ट लोकल, दि ट्रेन, भवानी जंक्शन, रेल का डिब्बा, हाफ टिकट, लास्ट ट्रेन फ्राम बॉम्बे, डिकेन क्वीन, बॉम्बे मेल।
असल में भारतीय रेलवे आम जन-जीवन से इतनी जुड़ी हुई है कि यह किसी न किसी रूप में आपके जीवन में स्थान रखती है। आप किसी से बात करें संभावना यह होती है कि उसके परिवार या एक्स्टेंडिड परिवार से कोई न कोई रेलवे में जरूर होता था, पापा, चाचा, ताऊ, मामा, भतीजा। यह तो साहित्य और फिल्मों की बात है अन्यथा खेल की दुनिया हो या जीवन के अन्य क्षेत्र उदाहरण के तौर पर पी टी ऊषा, विश्वनाथन आनंद, पी वी सिंधु, महेंद्र सिंह धोनी हो, लाला अमरनाथ या फिर डायना एडुलजी, गुरबक्स सिंह, पूरन सिंह या फिर मेकलुस्कीगंज को बसाने का श्रेय रखने वाले मेकलुस्की के पिता। एक वक़्त था जब अपनी अपनी किस्मत आज़माने रेल से ही मुंबई उतरते रह हैं। सालों साल लोकल ट्रेन में सफर करते हैं कई बार तो बेटिकट भी।
