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संपादकीय : देख लूंगा, छोड़ूंगा नहीं!.. क्या करोगे?

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस विरोधियों के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह महाराष्ट्र की संस्कृति को शोभा नहीं देती। एक तो महाराष्ट्र में राजनेताओं की झुंडशाही बढ़ गई है। इसके चलते गुंडों के हौसले बुलंद हैं। इन गिरोहों को पालने के लिए भ्रष्टाचार से कमाया गया पैसा इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी भ्रष्ट पैसे के दम पर विधायक-सांसद तोड़े जाते हैं और इस पर कोई उंगली न उठाए, ऐसा श्री फडणवीस को लगना उनके कमजोर नेतृत्व की निशानी है। सरकार ने मुंबई-पुणे हाईवे पर ‘मिसिंग लिंक’ नाम का जो कारनामा किया है, वह भ्रष्टाचार का एक वैश्विक नमूना है। अगर कोई मिसिंग लिंक के भ्रष्टाचार पर शोध करे, तो उसे कैंब्रिज या ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ‘डॉक्टरेट’ की उपाधि मिल सकती है। पहली ही बारिश में इस मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट के बारह बज गए। लिंक पर ७,१८० करोड़ रुपए खर्च किए गए। एक किलोमीटर मिसिंग लिंक बनाने की लागत ५४० करोड़ रुपए आई। यह हैरान करनेवाला है! अब जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की मूल लागत ४,७९७.५५ करोड़ रुपए थी। इसमें दो सुरंगें, आठ लेन की सड़क और दो पुलों के साथ करीब १३ किलोमीटर का रोड प्रोजेक्ट डिजाइन था। कोई कितनी भी लूटपाट कर ले, (सरकारी नियमों के अनुसार) यह खर्च साढ़े पांच हजार करोड़ से ऊपर नहीं जा सकता था (खा-पीकर डकार लेने के बाद भी), लेकिन इस मिसिंग लिंक का खर्च ७,१८० करोड़ रुपए दिखाया गया। मूल कीमत से करीब २,५०० करोड़ रुपए ज्यादा खर्च करके भ्रष्टाचार का विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। इसके बावजूद अगर मिसिंग लिंक से भर-भरकर पानी रिस रहा है तो क्या जनता सरकार से सवाल न पूछे? मिसिंग लिंक के २,५०० करोड़ के भ्रष्टाचार पर सवाल उठानेवाली जनता को मुख्यमंत्री फडणवीस ने धमकी दी है, ‘हमारे भ्रष्टाचार पर सवाल उठाना महाराष्ट्र की बदनामी है। बदनामी करनेवालों को देख लूंगा।’
भ्रष्टाचार पर शंका
और सवाल उठानेवालों को ‘भाड़े के’, ‘कुत्ते’ जैसे चुनिंदा शब्दों से नवाज कर मुख्यमंत्री ने विधानसभा में एक नई परंपरा शुरू की है। फडणवीस ने एक बार कहा, ‘शरद पवार, उद्धव ठाकरे का मतलब महाराष्ट्र नहीं है।’ तो फिर देवेंद्र फडणवीस का मतलब तो रत्तीभर भी महाराष्ट्र नहीं है। वे महाराष्ट्र को तोड़ने का सपना लेकर ही राजनीति में आए हैं। इसलिए उनका महाराष्ट्र राज्य से कोई भावनात्मक नाता नहीं है। मुगलों और अंग्रेजों की तरह लूटो और निकलो, यही उनकी नीति है। महाराष्ट्र को सुसंस्कृत मुख्यमंत्रियों की एक लंबी ‘माला’ विरासत में मिली है। यशवंतराव चव्हाण के समय से महाराष्ट्र संस्कारों और संस्कृति की परंपरा को सहेजता आया है। यशवंतराव की बात करें तो वे प्रज्ञा और प्रतिभा, विवेक और विचार, संयम और सहिष्णुता, मर्दानगी और कूटनीति जैसे गुणों से समृद्ध व्यक्तित्व थे। यशवंतराव के व्यक्तित्व में महाराष्ट्र और भारत का कल्याण करने का असीम सामर्थ्य था। क्या देवेंद्र फडणवीस के भीतर आज यशवंतराव जैसा एक भी गुण दिखाई देता है? मारोतराव कन्नमवार, वसंतराव नाईक, वसंतदादा पाटील, शंकरराव चव्हाण, शरद पवार, विलासराव देशमुख, मनोहर जोशी, उद्धव ठाकरे जैसे मुख्यमंत्रियों ने मराठी शब्दों की ताकत को समझा और उन्हें हमेशा तौल-माप कर इस्तेमाल किया। उन्होंने विधानसभा का उपयोग विरोधियों को धमकियां देने और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने के लिए कभी नहीं किया। इन सभी मुख्यमंत्रियों ने महाराष्ट्र को एक सही सोच और दिशा दी। विचार कभी भ्रष्टाचार या धमकी की भाषा से पैदा नहीं होते, वह ताकत संस्कारों और संघर्ष से आती है। ‘देख लूंगा’ यह गुंडों की भाषा है और ऐसी भाषा बोलनेवाले शासक को संवैधानिक पद पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है। फडणवीस का कभी किसी सामाजिक आंदोलन से कोई सरोकार नहीं रहा।
स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष की
आंच कभी उनके कानों तक नहीं पहुंची। भाजपा और मिंधे गुट कोई संस्कारों या आभूषणों की खान नहीं हैं। यह पूरी जमात ही भ्रष्टाचार की पैदाइश है तो इनसे क्या उम्मीद की जाए? सार्वजनिक जीवन के नेताओं को खुद पर कुछ पाबंदियां लगाकर अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए। सार्वजनिक जीवन में नैतिक चरित्र, काबिलियत, अध्ययनशीलता, गुणों की कद्र और जन-संग्रह का विशेष महत्व होता है। जिसके पास इतनी न्यूनतम पूंजी भी न हो, वह ज्यादा प्रगति नहीं कर सकता। अगर फडणवीस और मिंधे जैसे लोगों को लगता है कि वे सर्वशक्तिमान या परिपूर्ण हैं तो यह उनकी भूल है। सरकार के बाहर भी ऐसे कई महान लोग हुए हैं जिन्होंने राज्य में अद्भुत काम किए हैं, लेकिन फडणवीस और उनके ‘उपटरावों’ (चाटुकारों) का सबसे बड़ा काम ५०-५० करोड़ में विधायक-सांसद खरीदकर सरकार चलाना है। यह लोकतंत्र का मखौल है। इन लोगों को यह नहीं लगता कि इससे महाराष्ट्र की बदनामी हो रही है। फडणवीस और उनके लोग पूरी तरह प्रतिशोध की भावना से काम कर रहे हैं। उन्हें सरकार के भ्रष्टाचार पर बोलना कतई पसंद नहीं है। यह सरासर गुंडागर्दी है। आप मुख्यमंत्री पद पर बैठे हैं इसलिए यह गुंडागर्दी झेली जा रही है, लेकिन जनता में भारी आक्रोश है। एक अकेले मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट से २,५०० करोड़ रुपए सीधे इन गुंडों की जेब में चले गए। यह महाराष्ट्र के लिए बेहद शर्मनाक है। राज किस पार्टी का है, उसे कौन चला रहा है, इससे ज्यादा महत्व इस बात का है कि उसे कैसे चलाया जा रहा है। आज राज चलाया नहीं जा रहा, बल्कि ‘चंपत राय’ शैली की कैबिनेट महाराष्ट्र को लूट रही है। इस पर आवाज उठानेवालों को मुख्यमंत्री फडणवीस ‘देख लेने’ की धमकी दे रहे हैं तो वे असल में क्या करेंगे? भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलनेवालों की जुबान काट देंगे या उन्हें कारसेवकों की तरह गोलियों से भून देंगे?

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