-अपराधियों को सरकार का आशीर्वाद
– एक ही वर्ष में २६,१३७ महिलाएं, ७,७७७ नाबालिग लड़कियां लापता
– अंतिम सप्ताह प्रस्ताव पर विपक्ष ने कामकाज की खोली पोल
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में महायुति सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। सत्ताधारियों के आशीर्वाद से अपराध और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। यह आरोप लगाते हुए शिवसेना सहित विपक्षी दलों ने आज विधान परिषद में ‘अंतिम सप्ताह प्रस्ताव’ पर बोलते हुए सरकार के कामकाज का पर्दाफाश किया।
अंबादास दानवे ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने सदन में संदर्भ देते हुए बताया कि डोंबिवली के नगरसेवक रमेश म्हात्रे ने एक महिला से मारपीट की और मुरबाड के विधायक ने विश्वनाथ पनवेलकर को धमकियां दीं। एजाज लकड़ावाला के नाम का उल्लेख वाले एक पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। मुंबई में एक पुलिस अधिकारी पर नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के आरोप, अकोला में एक सहायक पुल् िास उपनिरीक्षक पर लगे आरोप, नई मुंबई के रबाले पुलिस स्टेशन की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवाल और छत्रपति संभाजीनगर व केज की घटनाओं का जिक्र करते हुए दानवे ने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। पिंपरी-चिंचवड़ में जहरीली शराब के मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और निर्दोष नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने में पूरी तरह विफल रही है।
मामलों को ठंडे बस्ते में डाल रही है सरकार
सरकार की विफलताओं को लेकर विपक्ष द्वारा सदन में सवाल उठाए जाते हैं। भ्रष्टाचार और अत्याचार के मामलों पर सरकार ने क्या कार्रवाई की, इसकी जानकारी मांगी जाती है। लेकिन सरकार अधिकांश मामलों में ‘एसआईटी’ गठित करने का आश्वासन देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देती है, ऐसा तंज शिवसेना विधायक एडवोकेट अनिल परब ने कसा।
उन्होंने मांग की कि नियम २५९ के प्रस्ताव के तहत सरकार यह जानकारी सदन को दे कि पिछले दो वर्षों में कितनी एसआईटी गठित की गर्इं, उनकी ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ क्या है और क्या उनकी जांच पूरी हो चुकी है?
राजस्व विभाग का सबसे बड़ा घोटाला
धारा १५५ का दुरुपयोग हो रहा है। मैंने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा उठाया था। धारा १५५ का असल उद्देश्य क्या है? सातबारा (भूमि रिकॉर्ड) पर नाम की स्पेलिंग में गलती सुधारना या कोई छोटा-मोटा बदलाव करना, इस धारा का उद्देश्य है। इसके विपरीत, केवल पुणे संभाग में गठित समिति की रिपोर्ट में ऐसे तीन हजार मामले सामने आए हैं। इस घोटाले में करीब १६७ अधिकारी और कर्मचारी शामिल पाए गए। परब ने सवाल उठाया कि क्या इन दोषी अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई की गई है।
