-विधानसभा में गूंजी काशीमीरा की बीएसयूपी योजना
-४,१३६ में सिर्फ ४९२ परिवारों को मिला घर
-हजारों अब भी ट्रांजिट कैंप में
सुरेश गोलानी / मुंबई
सरकार के नगरविकास विभाग से जुड़े अधिकारियों पर लेटलतीफी और टालमटोल का आरोप लगाते हुए भाजपा विधायक नरेंद्र मेंहता ने गुरुवार को ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से विधानसभा के मानसून सत्र में काशीमीरा के शहरी गरीबों के लिए बुनियादी सेवाएं (बीएसयूपी) आवास परियोजना का मुद्दा उठाया।
गौरतलब है कि नगर विकास विभाग के मंत्री एकनाथ शिंदे हैं और बीएसयूपी योजना उन्हीं के गुट के विधायक प्रताप सरनाइक के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में मेहता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने महायुति में भाजपा और शिंदे गुट के बीच चल रहे शीत युद्ध को फिर एक बार उजागर कर दिया है। शहरी गरीबों के जीवन स्तर को बढ़ाने के लिए, मनपा ने एक निजी संस्था द्वारा कराए गए सर्वे के पश्चात २००९ में बीएसयूपी आवास परियोजना को लागू करने हेतु काशीमीरा इलाके में स्थित दो झुग्गी समूहों जनता नगर और क्रांति नगर को चुना था। विडंबना यह है कि आवश्यक धन की कमी के कारण अब तक केवल ४९२ झुग्गीवासियों (सन् २०१७ में १७८ और सन् २०२१ में २८४) का पुनर्वास किया जा सका है, जबकि बाकी लाभार्थी १७ वर्षों से अपने घर मिलने का सपना ही देख रहे हैं। कुछ इमारतें आधी-अधूरी स्थिति में हैं, जबकि ज्यादातर का निर्माण अभी भी शुरू होना बाकी है। २९२ करोड़ रुपए की परियोजना (जो बाद में ७५ करोड़ बढ़ गई) के शुरुआती वित्तपोषण (फंडिंग) पैटर्न के अनुसार, केंद्र सरकार और राज्य सरकार, दोनों का क्रमश:५० प्रतिशत और ३० प्रतिशत निवेश, मनपा का ९ प्रतिशत योगदान और शेष राशि लाभार्थियों द्वारा दी जानी थी। हालांकि केंद्र सरकार में सत्ता परिवर्तन के एक साल बाद ही २०१५ में बीएसयूपी योजना को अचानक रद्द कर दिया गया और ये योजना खटाई मे प़ड़ गई। ज्ञात हो की योजना को पूरा करने में हुई देरी के कारण केंद्र सरकार ने पहले ही इकाइयों की संख्या ४,१३६ से घटाकर २,३५१ कर दी है, जिसके चलते १९०० अन्य झुग्गीवासियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। मेहता का आरोप है कि तीन बार इस योजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से पूरा करने हेतु मनपा द्वारा भेजे गए प्रस्तावों को नगर विकास विभाग के अधिकारियों ने मामूली त्रुटियों को आधार बनाकर अस्वीकार कर दिया। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान जवाब देते हुए राज्य मंत्री माधुरी मिसाल ने मनपा को संशोधित प्रस्ताव पेश करने के निर्देश देते हुए पीपीपी मॉडल को ८ दिनों में मंजूरी देने का आश्वासन दिया।
बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार जांच के घेरे में
झुग्गीवासियों के पुनर्वास के बजाय कुछ दलालों ने स्थानीय नेताओं और मनपा के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से आवंटित फ्लैट बेचने और किराए पर देने का कारोबार खड़ा कर दिया। लाभार्थियों की सूची में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम जोड़ने के आरोपों की जांच आर्थिक अपराध विभाग (ईओडब्ल्यू) को सौंपी गई थी, जिसमें कुछ दलाल गिरफ्तार भी हुए। आरोपी नेताओं को बाद में भाजपा ने टिकट देकर नगरसेवक बनाया।
सिर्फ एक नारा है ‘सबका पक्का घर हो अपना’
‘सबका पक्का घर हो अपना’ का नारा देने वाली भाजपा पर आरोप है कि मीरा-भायंदर में वर्षों के शासन के बावजूद काशीमीरा के हजारों झुग्गीवासियों को आज तक स्थायी आवास नहीं मिला। पुनर्वास के नाम पर वे १७ वर्षों से ट्रांजिट वैंâपों में बदहाल और नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
