-चार दिन बाद भी नहीं लौटी लोकल की रफ्तार…वसई स्टेशन पर फूटा यात्रियों का गुस्सा
जेदवी
मुंबई में बारिश भले ही कम हो गई हो, लेकिन सरकार और रेलवे की तैयारियां अब भी पानी में डूबी नजर आ रही हैं। चार दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश का असर आज भी पश्चिम रेलवे की पटरियों पर साफ दिखाई दे रहा है। वसई रोड से विरार और दहानू रोड के बीच लोकल ट्रेनें २५ से ३० मिनट की देरी से चल रही हैं, जबकि लाखों यात्रियों की रोजमर्रा की जिंदगी अब भी अव्यवस्था की सजा भुगत रही है।
हर साल मानसून से पहले करोडों रुपए खर्च करने के दावे किए जाते हैं। बैठकों की तस्वीरें जारी होती हैं, तैयारियों के लंबे-चौड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली तेज बारिश आते ही पूरा सिस्टम पानी में बह जाता है। इस बार भी वही हुआ। फर्क सिर्फ इतना है कि बयान बदल गए, लेकिन हालात नहीं।
बुधवार को वसई स्टेशन पर यात्रियों का सब्र आखिर टूट गया। लगातार देरी और ट्रेनों के शार्ट टर्मिनेट होने से नाराज लोगों ने ट्रेन रोक दी। यात्रियों का स्पष्ट कहना था कि यदि ट्रेन विरार तक नहीं जाएगी, तो आगे भी नहीं जाएगी। यह गुस्सा किसी लोको पायलट या रेलवे कर्मचारी के खिलाफ नहीं था, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ था, जो हर साल एक जैसी नाकामी दोहराती है।
६ और ७ जुलाई की बारिश ने सरकारी दावों की पूरी परत उधेड़ दी। कई लोकल ट्रेनों को वसई रोड पर ही रोकना पड़ा। हजारों यात्रियों को घुटनों और कमर तक पानी में रेलवे ट्रैक के सहारे नालासोपारा और विरार तक पैदल जाना पड़ा। बिजली गुल रही, मोबाइल नेटवर्क ठप हो गया और वैकल्पिक व्यवस्था पूरी तरह नदारद रही। ऊपर से निजी ऑटो और ट्रैक्टर चालकों ने मजबूर यात्रियों से मनमाना किराया वसूला, लेकिन व्यवस्था मूकदर्शक बनी रही।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर हर मानसून में नालासोपारा-विरार रेल मार्ग ही क्यों डूबता है? यदि समस्या हर साल एक ही जगह आती है, तो उसका स्थायी समाधान आज तक क्यों नहीं हो पाया?
पुणे-मुंबई रेल मार्ग पर भूस्खलन का ब्रेक
मुंबई। पुणे-मुंबई घाट सेक्शन में ६ जुलाई को हुए भीषण भूस्खलन ने रेलवे की मानसून तैयारियों और आपदा प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। युद्धस्तर पर बहाली के दावों के बावजूद तीन दिन बाद भी रेल सेवा पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है। फिलहाल एक ट्रैक के सहारे ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है, जबकि दूसरी मुख्य लाइन और स्लिप लाइन अब भी बंद है। इसका सीधा असर हजारों यात्रियों पर पड़ रहा है, जिन्हें घंटों देरी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी माना है कि भूस्खलन से रेलवे ट्रैक के साथ आसपास के क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है और निर्माण सामग्री पहुंचाना चुनौती बना हुआ है। स्लिप लाइन बंद होने के कारण बैंकर लोकोमोटिव का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। मध्य और पश्चिम रेलवे की टीमें जिला प्रशासन व वन विभाग के सहयोग से बहाली कार्य में जुटी हैं।
