२१ घंटे के रेस्क्यू के बाद वन विभाग ने बचाई बेशकीमती जान
सामना संवाददाता / मुंबई
ठाणे के येऊर जंगल क्षेत्र में वन विभाग की तत्परता और अथक प्रयासों के चलते एक वयस्क नर तेंदुए को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। गंभीर रूप से घायल और चलने में असमर्थ पाए गए इस तेंदुए को लगभग २१ घंटे लंबे बचाव अभियान के बाद सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। वर्तमान में उसका बोरीवली स्थित तेंदुआ बचाव केंद्र में गहन उपचार चल रहा है।
जानकारी के अनुसार, रविवार शाम करीब ५ बजे वनकर्मियों ने पाचपखाड़ी आरक्षित वन क्षेत्र में एक पेड़ पर बैठे कमजोर और घायल तेंदुए को देखा। इसकी सूचना मिलते ही वन विभाग, महाराष्ट्र राज्य सुरक्षा निगम तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं डब्ल्यूडब्ल्यूए और आरएडब्ल्यूडब्ल्यू की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं।
रात के समय बचाव अभियान चलाना जोखिम भरा होने के कारण अधिकारियों ने पूरी रात क्षेत्र की निगरानी की। इसके बाद खोजी दलों ने तेंदुए का पता लगाया, जो लगभग ८० मीटर आगे बढ़ने के बाद घनी झाड़ियों में गिर गया था। चिकित्सकीय जांच में तेंदुए की स्थिति गंभीर पाई गई। उसके चारों पंजों के तलवों पर गहरे घाव थे, जबकि पिछले पैर में बड़ा जख्म होने के कारण हड्डी तक दिखाई दे रही थी। वन अधिकारियों के अनुसार, तेंदुआ अत्यधिक कमजोर अवस्था में था और उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी। येऊर के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर मयूर सुरवासे ने बताया कि तेंदुए की चोटें बेहद गंभीर थीं। ऐसे में समय पर उपचार उपलब्ध कराना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि वन विभाग और सहयोगी संस्थाओं के उत्कृष्ट समन्वय तथा सतर्कता के कारण यह चुनौतीपूर्ण अभियान सफल हो सका। फिलहाल तेंदुए का बोरीवली तेंदुआ बचाव केंद्र में विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की निगरानी में उपचार किया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि उचित इलाज और देखभाल के बाद तेंदुआ जल्द स्वस्थ होकर सामान्य स्थिति में लौट सकेगा।
