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यूपी में १९ लाख ‘फर्जी वोटर’!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में २०२७ के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रदेश में १९,२०,७३२ कथित फर्जी मतदाताओं का दावा किया है। अखिलेश के इस आरोप ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण, पारदर्शिता और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इन सभी नामों के फर्जी होने की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान अखिलेश ने बताया कि पार्टी ने मतदाता सूची की पड़ताल के लिए हर जिले और विधानसभा क्षेत्र में ‘पीडीए प्रहरी’ दल तैनात किए हैं। पार्टी का दावा है कि जांच के दौरान ऐसे मतदाताओं के नाम सामने आए, जिनके नाम, उम्र और रिश्तेदारों के नाम एक जैसे होने के बावजूद अलग-अलग बूथों पर प्रविष्टियां दर्ज हैं। अखिलेश के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान ८७.५६ लाख फॉर्म-६ आवेदन प्राप्त हुए, जबकि ८४.३ लाख नए मतदाताओं को सूची में शामिल किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि कुल आवेदनों में से केवल ७१.३८ लाख का ब्योरा ही सार्वजनिक क्यों किया गया। सपा अध्यक्ष ने १६.१८ लाख आवेदनों की जानकारी सार्वजनिक न होने और करीब तीन लाख अन्य संदिग्ध प्रविष्टियों को मिलाकर १९.२० लाख से अधिक कथित फर्जी मतदाताओं का दावा किया।
एक नाम, कई वोटर आईडी का आरोप
सपा ने लखनऊ पूर्व विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए एक व्यक्ति के नाम पर चार अलग-अलग मतदाता पहचान पत्र दर्ज होने का दावा भी किया है। पार्टी ने गोरखपुर के कैंपियरगंज समेत अन्य क्षेत्रों में भी कथित दोहरी प्रविष्टियों का मुद्दा उठाया है। इन मामलों की आधिकारिक जांच और पुष्टि के बिना सभी प्रविष्टियों को फर्जी घोषित नहीं किया जा सकता।
१६.१८ लाख फॉर्म-६ आवेदनों का ब्योरा सार्वजनिक न होने पर उठाए सवाल, करीब ३ लाख अन्य संदिग्ध नामों का भी दावा

अखिलेश यादव ने मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। अब बड़ा सवाल यह है कि १६.१८ लाख आवेदनों के ब्योरे को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर चुनाव आयोग क्या स्पष्टीकरण देता है और कथित दोहरी प्रविष्टियों की जांच कैसे होती है।

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