सामना संवाददाता / नई दिल्ली
केंद्र की मोदी सरकार के १२ साल पूरे होने पर जहां भाजपा उपलब्धियों का बखान कर रही है, वहीं विपक्ष इसे ‘देश बर्बादी के १२ साल’ करार दे रहा है। विपक्षी दलों ने मोदी सरकार का घेराव करते हुए कहा कि इन १२ सालों में देश की तमाम सरकारी कंपनियां बेच दी गर्इं। जनता के माथे महंगाई का भारी बोझ लाद दिया गया। स्वतंत्र एजेंसियां तानाशाह की शिकार हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर और समाज को विभाजित करने की राजनीति की। १२ साल में देश मजबूत नहीं, बल्कि महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक तनाव से कमजोर हुआ है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष अब सरकार के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन की रणनीति बनाने में जुट गया है।
विपक्ष का कहना है कि वर्ष २०१४ में ‘अच्छे दिन’ और विकास के वादों के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार ने बीते १२ वर्षों में देश को आर्थिक, सामाजिक और लोकतांत्रिक संकट की ओर धकेल दिया। सरकार ने बड़े-बड़े पैâसलों को ऐतिहासिक बताकर प्रचारित किया, लेकिन आम जनता को उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला। विपक्ष ने नोटबंदी को देश की अर्थव्यवस्था पर सबसे बड़ा हमला बताया। उनका कहना है कि इससे छोटे व्यापार, असंगठित क्षेत्र और करोड़ों रोजगार बर्बाद हुए, जबकि काले धन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इसी तरह जीएसटी को भी विपक्ष ने ‘गब्बर सिंह टैक्स’ बताते हुए कहा कि इससे छोटे कारोबारी और मध्यम वर्ग परेशान हुआ। कृषि कानूनों को लेकर भी विपक्ष सरकार पर हमलावर रहा। विपक्षी नेताओं का कहना है कि किसानों की लंबे आंदोलन के बाद हुई मौतों के बावजूद सरकार ने उनकी मांगों को अनसुना किया और अंततः कानून वापस लेने पड़े। बेरोजगारी, महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर भी सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर रही है।
एजेंसियों के दम पर विपक्ष को घेरने का आरोप
विपक्ष ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता प्रभावित हुई। जांच एजेंसियों के दुरुपयोग, विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई और मीडिया पर दबाव जैसे मुद्दों को लेकर सरकार की आलोचना होती रही। साथ ही सामाजिक सौहार्द बिगड़ने और धार्मिक ध्रुवीकरण बढ़ने के आरोप भी लगाए गए। हालांकि भाजपा सरकार अपने फैसलों को देशहित में उठाए गए साहसिक कदम बताती है। सरकार का दावा है कि अनुच्छेद ३७० हटाने, डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, इंप्रâास्ट्रक्चर विकास और वैश्विक मंचों पर भारत की मजबूत स्थिति जैसे कदमों ने देश को नई दिशा दी है।
