सामना संवाददाता / मुंबई
जिस उम्र में अधिकांश किशोर अपनी स्कूली पढ़ाई और सामान्य गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में 15 वर्षीय वृत्ति अविचल ने लेखन, सार्वजनिक वक्तृत्व, कला और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। पहली किताब 13 की उम्र में लिखी। 1 दिन में 6 बुक प्रकाशन के लिए इन्हें अवॉर्ड भी दिया गया था। मुंबई की इस प्रतिभाशाली किशोरी ने एक ही दिन में अपनी आठ अंग्रेज़ी पुस्तकों का प्रकाशन कर इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है।
वृत्ति अविचल की प्रकाशित पुस्तकों में Divided by Design, Light After Shadows, The Darkest Chapter, The Valley that Broke Hearts, Village to Verdict, Arabella’s Journey from Shadows to Sunshine, The Yellow Line और The Living Symphony शामिल हैं। इन पुस्तकों में समानता, न्याय, शांति, संघर्ष से उबरने की क्षमता, भारतीय संस्कृति और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है।
लेखन के साथ-साथ वृत्ति अविचल एक प्रभावशाली सार्वजनिक वक्ता (पब्लिक स्पीकर) के रूप में भी अपनी पहचान बना चुकी हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने TEDx Youth @ Palm Road के मंच से अपने विचार साझा किए। इसके अलावा उन्होंने 10वें रेडियो चिको स्विट्जरलैंड वर्ल्ड पीस वीक के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व भी किया।
उन्हें कॉमनवेल्थ एसे प्रतियोगिता में रजत पदक (सिल्वर मेडल) से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त कला, वाद-विवाद, निबंध लेखन, पॉडकास्टिंग और मोनो एक्टिंग जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किए हैं।
साहित्य और शिक्षा तक पहुंच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वृत्ति अविचल अपनी पुस्तकों का दान मुंबई और पुणे के विभिन्न विद्यालयों के पुस्तकालयों में भी कर चुकी हैं।
साहित्य और रचनात्मकता को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम मानने वाली वृत्ति अविचल आगे भी लेखन, सार्वजनिक वक्तृत्व और कला के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में कार्य करती रहना चाहती हैं।
साहित्य और शिक्षा से इतर खेलों में भी उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियां रही हैं। वह राज्य स्तरीय थ्रोबॉल खिलाड़ी हैं और वर्ष 2024 में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने राज्य स्तरीय शतरंज प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया है। कम उम्र में हासिल की गई उनकी ये उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि रचनात्मकता, समर्पण और सामाजिक सरोकार के माध्यम से युवा पीढ़ी भी समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रभावशाली भूमिका निभा सकती है।
