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संपादकीय : भ्रमित मुख्यमंत्री और उनकी अफवाहों की फैक्टरी

महाराष्ट्र में एनडीए के साथ कोई भी नया दल शामिल नहीं होगा; अभी जो दल हैं, वही बने रहेंगे, ऐसा मुख्यमंत्री फडणवीस ने एलान किया है। श्री फडणवीस कितने लाचार और भ्रमित शख्स हैं, यह उनके इस बयान से साफ झलकता है। शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस के एनडीए में शामिल होने की खबरें खुद बीजेपी खेमे की तरफ से ही उड़ाई जा रही हैं। भाजपा का मतलब ही है खबरें उड़ाने और अफवाहें पकाने का कारखाना और मुख्यमंत्री खुद इस कारखाने के चेयरमैन हैं। मुख्यमंत्री के इस कारखाने में कम से कम दो हजार वेतनभोगी लोग काम करते हैं और इस पर हर महीने करोड़ों रुपये खर्च होते हैं (जिसे आई.टी. सेल कहा जाता है)। मुख्यमंत्री ने अफवाहों के कारखाने कामयाबी से खड़े किए हैं, शायद इसीलिए उन्हें ‘इंफ्रामैन’ की उपाधि मिली होगी। जब भी महाराष्ट्र के बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाना होता है, तो ये ‘इंप्रâामैन’ अपनी अफवाहों की पैâक्टरी का माल बाहर निकालते हैं और राज्य में भ्रम फैला देते हैं। अब शरद पवार की पार्टी के एनडीए में शामिल होने की अफवाह इसी देवेंद्र फैक्टरी ने छोड़ी और अब उस पर सफाई भी वही दे रहे हैं। शरद पवार की पार्टी के एनडीए का घटक दल बनने की संभावना को खुद फडणवीस ने खारिज किया है। बीजेपी की अफवाह फैक्टरी ने पहले यह ढिंढोरा पीटा कि शरद पवार की पार्टी के सांसद टूट रहे हैं। जब वे नहीं टूटे तो कहा गया कि पवार की पूरी पार्टी ही एनडीए में विलीन हो रही है। फिर जब यह झूठ भी नहीं पचा तो कहा गया कि सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार को छोड़कर दोनों एनसीपी का विलय हो रहा है। अब इसमें से सच क्या है, यह तो खुद श्री शरद पवार ही बता सकते हैं। शरद पवार और फडणवीस की मुलाकात होने की बात भी सामने आई है, लेकिन यह मुलाकात
महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा
विवाद को लेकर होनेवाली है और इस बैठक में कम से कम पांच से २५ नेता शामिल हो रहे हैं। बेलगाम की ‘महाराष्ट्र एकीकरण समिति’ का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी इस बैठक में हिस्सा ले रहा है; ऐसे में सीमा विवाद की बैठक के भीतर पवार-एनडीए विलय पर कोई गुप्त चर्चा होगी, ऐसी खबर फडणवीस की फैक्टरी से बाहर आना बेहद हास्यास्पद है। पवार गुट के जयंत पाटील और बीजेपी के विनोद तावडे ने एक-दूसरे से मुलाकात की। तावडे और पाटील के मिलते ही यह अफवाह उड़ा दी गई कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पक्के तौर पर बीजेपी के पाले में जा रही है, ताकि महाविकास आघाडी में अविश्वास और संदेह पैदा किया जा सके। अब असलियत क्या है, यह खुद जयंत पाटील ने ही साफ कर दिया है। वे कहते हैं, ‘मुंबई के एक होटल में संसदीय समिति की बैठक थी। उस बैठक में सांसद सुप्रिया सुले मौजूद थीं। बीच के समय में मैं किसी काम से उनसे मिलने गया था। वहां विनोद तावडे भी मौजूद थे। तावडे भी उस संसदीय समिति के सदस्य हैं। उनके साथ मेरी सबके सामने ही बातचीत हुई।’ महाराष्ट्र का राजनीतिक माहौल इतना दूषित हो चुका है कि कोई किसी से मिल ही नहीं सकता। अगर आप मिले तो झूठी खबरें फैलाकर भ्रम पैदा कर दिया जाता है। जिस संसदीय समिति में तावडे और सुले हैं, उसी में शिवसेना के अरविंद सावंत भी हैं; जाहिर है कि सावंत-तावडे-सुले भी वहां अगल-बगल ही बैठते होंगे। अगर अफवाहों की फैक्टरी को यह पता चल जाए, तो वे कोई नया ही शिगूफा छोड़ देंगे और उसका खामियाजा नाहक तावडे को भुगतना पड़ेगा। असल में मौजूदा राजनीति का गणित यह है कि महाराष्ट्र में क्या होना है, यह सब दिल्ली से तय होता है। राज्य के मुख्यमंत्री को तो सिर्फ आखिरी वक्त पर हुक्म सुना दिया जाता है। यहां कोई भी बीजेपी या एनडीए में दिल से शामिल हो रहा हो, ऐसा मंजर नहीं है।
पैसे के दम पर
और ‘निधि’ की दादागीरी चलाकर विधायक-सांसद तोड़े जाते हैं। ऊपर से केंद्रीय जांच एजेंसियों का डर तो है ही। पहले ही दो प्रमुख पार्टियों को उन्होंने तोड़ा और उनके गुटों को अपने खूंटे से बांध लिया। जब अजीत पवार का गुट पहले से ही एनडीए में है, तब अमित शाह मूल एनसीपी को भी साथ लेंगे, ऐसा सोचना ही अक्कल शून्यता है। राम मंदिर लूट के मामले में देशभर में भाजपा की किरकिरी हो रही है। उनका मूल जनाधार खिसक रहा है। रामभक्त भाजपा से नाराज हैं। भाजपा के पतन और ढलान की शुरुआत हो चुकी है। जिन समझदारों को यह बात समझ आ गई है, वे भाजपा की इस डूबती कश्ती पर पैर नहीं रखेंगे। महाराष्ट्र में भाजपा की इस बेईमानी के खिलाफ जनता में भारी गुस्सा है। ऊपर से रामद्रोह का मामला भी खुलकर सामने आ गया। मोदी की लोकप्रियता रुपए की कीमत की तरह लगातार गिर रही है और अमित शाह को खुद उनकी अपनी पार्टी के भीतर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय राजनीति और इसकी राजनीतिक संस्कृति का बंटाधार करके भाजपा ने देश को संकट में डाल दिया है। इसलिए अब अगर कोई भाजपा या एनडीए के साथ जाता है तो वह आत्मघाती ही साबित होगा। हमें तो भविष्य में खुद भाजपा के ही टुकड़े-टुकड़े होने की संभावना ज्यादा दिखती है। मुख्यमंत्री की कार्यशैली देखकर कई लोगों को हैरत हो रही होगी। राम मंदिर की लूट पर वे मुंह नहीं खोलते। उप मुख्यमंत्री ‘मिंधे’ (शिंदे) के गुंडों ने ठाणे जिले में एक महिला डॉक्टर पर जानलेवा हमला किया, उस पर वे कुछ नहीं बोलते; लेकिन ‘एनडीए’ में किसी नए खिलाड़ी के लिए जगह नहीं है, जैसे विषयों पर वे बड़े चाव से बोलते हैं। वे पूरी तरह बौखलाए और भ्रमित हैं। थोड़े निराश भी दिखाई देते हैं। दिल्ली में महाराष्ट्र को लेकर उनके मन के खिलाफ हो रही घटनाओं का यह नतीजा है!

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