मुख्यपृष्ठस्तंभपूर्वांचल पॉलिटिक्स : अंसारी की एंट्री से यूपी में सियासी तूफान!

पूर्वांचल पॉलिटिक्स : अंसारी की एंट्री से यूपी में सियासी तूफान!

हिमांशु राज

पूर्वांचल की सियासत इन दिनों मऊ सदर से उठती एक हलचल पर टिकी हुई है। सुभासपा के विधायक और दिवंगत बाहुबली मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी के बारे में चर्चा है कि वे जल्द समाजवादी पार्टी की छतरी तले आ सकते हैं। धर्मेंद्र यादव के साथ बैठक, सपा दफ्तर में गर्मजोशी भरा स्वागत और समर्थकों के बीच पैâली कानाफूसी-इन सबने मिलकर इन अटकलों को लगभग राजनीतिक सच में बदल दिया है। लेकिन विडंबना यह है कि जो ओम प्रकाश राजभर अब तक सपा में टूट के किस्से सुनाते रहे, अब उसी राजभर की पार्टी में सेंधमारी की खबरें तैर रही हैं और मऊ का यह एक विधायक पूरे समीकरण को झकझोर रहा है।
अब्बास की राजनीतिक यात्रा दरअसल सत्ता और व्यवस्था के टकराव की लंबी कहानी का विस्तार है। हेट स्पीच के मामले में सजा, सदस्यता समाप्ति, मऊ सदर सीट के रिक्त होने की अधिसूचना-सब कुछ मिलकर यह संदेश दे रहा था कि योगी सरकार ने अंसारी परिवार की सियासी जमीन लगभग बंजर कर दी है। लेकिन अदालत से मिली राहत, दोषसिद्धि पर प्रश्नचिह्न और विधायकी की बहाली ने यह भी दिखा दिया कि यह परिवार अभी पूरी तरह हाशिये पर धकेला नहीं जा सका। यहीं से शुरू होता है सपा और अंसारी परिवार के बीच संभावित समीकरण का नया अध्याय, जिसमें कानून और राजनीति की रेखाएं लगातार एक-दूसरे को काटती नजर आती हैं। अखिलेश यादव के लिए अब्बास की एंट्री दोधारी तलवार की तरह है। एक तरफ मऊ, गाजीपुर और आसपास के इलाकों में मुस्लिम मतों के साथ कुछ ओबीसी तबकों की गोलबंदी की संभावना है, जहां मुख्तार के पुराने असर और नेटवर्क की स्मृति अभी भी जिंदा है। दूसरी तरफ वही मुख्तार का नाम है, जिसे बीजेपी ने पिछले एक दशक में ‘माफियाराज’ का पर्याय बना दिया और जिस पर वार करते-करते उसने अपने ‘कानून–व्यवस्था मॉडल’ की इमारत खड़ी की। अंसारी परिवार का सपा के साथ खुला जुड़ाव बीजेपी के लिए ताजा गोला-बारूद होगा, जिसे वह २०२७ तक ‘तुष्टिकरण’ और ‘गुंडाराज लौट आया’ की राग अलाप भाषा में बार-बार चलाएगी। अखिलेश की असली चुनौती यही है कि वे इस गठजोड़ को किस नैरेटिव में पेश करते हैं। क्या वे इसे लोकतांत्रिक हक और राजनीतिक सुधार की कहानी बनाएंगे या बीजेपी के हमलों से बचने के लिए दूरी और नजदीकी का दोहरा खेल खेलेंगे?

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