मुख्यपृष्ठस्तंभ‘शर्म मगर हमको आती नहीं!'

‘शर्म मगर हमको आती नहीं!’

– जब एक ‘वर्चुअल आईलैंड’ बनकर रह गई मुंबई

-तीन दिनों की बारिश ने तीनों तरफ से काटे रास्ते

ई राज

मुंबई का इतिहास गवाह है कि यह किसी जमाने में सात छोटे-छोटे द्वीपों यानी आईलैंड्स की नगरी थी। वक्त बीतता गया और समुद्र की भराई (रिक्लेमेशन) के जरिए सातों द्वीप मिलकर एक हो गए। इस तरह मुंबई ने एक मुकम्मल महानगर की शक्ल अख्तियार की, जो आज देश की आर्थिक राजधानी बन चुका है।
महाराष्ट्र की इस राजधानी की देखरेख के लिए जिस बीएमसी (बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन) की स्थापना की गई है, उसका सालाना बजट देश के कई छोटे-मोटे राज्यों से भी ज्यादा है। लेकिन इस म्युनिसिपलिटी की नाकामियों ने मुंबईकरों का जीना मुहाल कर दिया है। प्रशासन की यह लापरवाही अब मुंबई के नागरिकों की जान से खिलवाड़ करने लगी है। बीएमसी के ढुलमुल रवैये को देखकर ऐसा लगता है जैसे उसने बोर्ड लगा रखा हो, ‘शर्म मगर हमको आती नहीं!’ और इस सूरत-ए-हाल में सरकार की बात ही क्या की जाए!
तीन तरफ से थमी मुंबई की रफ्तार
पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर मुंबई मनपा और अन्य संबंधित प्राधिकरणों के दावों की पोल खोलकर रख दी है। मुंबई को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली मुख्य धमनियां, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, मुंबई-अमदाबाद हाईवे और मुंबई-कोकण मार्ग, पूरी तरह ठप हो गर्इं। भारी भूस्खलन और जलभराव के कारण मुंबई अपने पड़ोसी जिलों से कटकर एक बार फिर एक वर्चुअल आईलैंड यानी आभासी द्वीप में तब्दील हो गई है।
करोड़ों रुपए की लागत से महज दो महीने पहले शुरू हुए ‘मिसिंग लिंक’ बाईपास के टनल-२ के पास करीब १०० टन मलबा आ गिरा, जिसने आधुनिक इंजीनियरिंग के दावों को जमींदोज कर दिया। वहीं कोकण रूट पर नागोठाणे के पास लोग २४ घंटे से अधिक समय तक सड़कों पर फंसे रहे।
रेल सेवा और जनजीवन पूरी तरह ठप
सड़क मार्ग ही नहीं, बल्कि मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल और सेंट्रल रेल सेवा भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। ठाकुरवाड़ी और मंकी हिल के पास हुए भूस्खलन के कारण मुंबई-पुणे रेल संपर्क टूट गया। इसके अलावा, गुजरात से आने वाली २० से अधिक लंबी दूरी की ट्रेनें पटरियों पर ही फंसी रहीं, जिससे हजारों यात्री बिना भोजन और पानी के डिब्बों में वैâद रहने को मजबूर हो गए। इस दौरान ४० से अधिक रेल सेवाएं प्रभावित हुर्इं और कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा।
तबाही के आंकड़े और प्रशासन की बेरुखी
इस आपदा ने अब तक १३ मासूम जिंदगियां निगल ली हैं। मावल और खेड़ में भूस्खलन तथा बाढ़ के पानी में बहने से ये मौतें हुर्इं। पालघर में महज दो घंटे में ३०० मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिसने तबाही का मंजर पैदा कर दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा और मुंबई हाई कोर्ट को भी वकीलों को राहत देनी पड़ी।
मौसम विभाग ने मुंबई, ठाणे और रायगड समेत पूरे एमएमआर (मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन) क्षेत्र के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है, जिसमें ३०० मिमी से अधिक बारिश और बादल फटने जैसी स्थिति की चेतावनी दी गई है।
हर मानसून की तरह इस बार भी एक बड़ा सवाल है कि आखिर हर साल ड्रेनेज, जल निकासी व्यवस्था की सफाई और मॉनसून की तैयारियों के नाम पर हजारों करोड़ रुपये का बजट बहाने वाली मनपा, मानसून की इस पहली परीक्षा में ही क्यों फेल हो जाती है? मुंबईकर भारी-भरकम टैक्स सुरक्षा और सुविधाओं के लिए चुकाते हैं, न कि हर मॉनसून में अपने ही घरों और सड़कों पर बंधक बनने के लिए। क्या बेशर्म प्रशासन अब भी अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेगा?

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