कहते हैं कि बारिश का मौसम,
होता है सुहाना।
हर कोई चाहे कि बारिश हो,
मिले गर्मी से छुटकारा।
लेकिन ये बाते सिर्फ
सुनने में ही है अच्छी।
आम इंसान कि हो जाती
है हालत बेबस-सी।
जगह-जगह पानी का जमाव,
लोग जाये कहा?
कोई व्यवस्था हो, तो हमें
बताओ जरा।
जीवन हो जाता है, अस्त-व्यस्त।
लोग जल-भराव से हो जाते है त्रस्त।
न कोई साधन है न बिजली की
व्यवस्था।
बस हर साल बारिश की है
यही अवस्था।
झूठे दावे साफ़ हो जाते हैं।
खुल जाते वादों के पोल।
बस यहां बारिश का हाल,
आम-आदमी हो जाता है बेहाल।
-मानसी श्रीवास्तव ‘ मानश्री ‘
