डॉ. हरि जोशी
आपको ज्ञात नहीं, विजय शाह मेरे अर्धआदिवासी गांव खुदिया का ही मूल निवासी है। अब वह बेचारा अपनी जिह्वा को ही कोस रहा होगा ‘जिह्वा तू बड़ी बावरी कहे अकास- पताल, तू तो कह भीतर गई, जूते पड़े कपाल।’
किंतु एक कहावत भी है ‘गरीब की लुगाई, सबकी भौजाई’ या ‘जंगल में भी सीधे पेड़ ही काटे जाते हैं।’ पिछले दिनों राहुल गांधी ने समूची सेना को चीन से पिटने वाली सेना बता दिया और किंतुु वह वक्तव्य गंभीरता से नहीं लिया गया? सेना पर दिए गए अन्य कई बयान भी अवांछित हैं, किंतु सबने मिलकर उस बेचारे आदिवासी को पराजय शाह बना डाला।
इन दिनों सारा तंत्र उसके पीछे लट्ठ लेकर पड़ा है। माना कि फिसली जबान से जो अर्थ निकले हैं वे अस्वीकार्य हैं, किंतु विजय शाह की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी ध्यान में रखी जाए?’ क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात।’
यदि विजय की पारिवारिक पृष्ठभूमि देखें तो अपराध शायद क्षम्य हो?
लगभग १०० साल पहले, पूर्व मकड़ाई स्टेट के आदिवासी राजा दृगपाल शाह का निधन हुआ, जिनकी कोई संतान नहीं थी। अंतिम संस्कार करने के पहले खोज की गई कि उनके वंश से जुड़ा हुआ कोई युवक लाया जाए, जिसे राजा की गद्दी पर बैठाया जा सके। दिवंगत राजा दृगपाल शाह की अर्थी तब ही उठ सकती थी, जब नया राजा गद्दी पर बैठा दिया जाता?
परिवारजनों को याद आया राज परिवार से जुड़ा हुआ वंश पास के गांव, गोमगांव में है। उस परिवार में एक लड़का है, जिसके पास एक भैंस है। वह युवक जिम्मेदारी से जंगल में भैंस चराता है। बस राजमहल से आदेश हो गया ‘उस युवक को, वह कहीं भी हो, लाकर तुरंत राजा बनाया जाए।’ राजा के सिपाही तत्कालीन हथियारों यानी बल्लम, लाठी, तीर-कमान से लैस होकर युवक को लाने निकल पड़े। सिपाही पहले तो उसकी झोपड़ी में गए। वहां मालूम हुआ कि लड़का तो भैंस चराने गया है। अब सब अर्दली जंगल की ओर दौड़े। आखिर खोजकर भावी राजा को पकड़ ही लिया।
इतने सिपाहियों को एक साथ अपने आस-पास देखकर चरवाहा डर गया। पूछा, ‘आप लोग ऐसे क्यों आए हैं? मैंने किसी का क्या बिगाड़ा है?’
वे आदर सहित झुककर बोले, ‘आप डरें नहीं, हमें आपको आज राजा की गद्दी पर बैठाना है।’
चरवाहे ने उत्तर दिया, ‘मैं राजा क्यों बनूंगा? क्या मुझे पागल कुत्ते ने काटा है? मुझे राजा नहीं बनना, मैं जंगल में ही खुश हूं।’
वैâसे नहीं चलोगे ‘राजाज्ञा है, आपको आज हम लेकर ही जाएंगे, और आपको राजा बनना होगा।’ सिपाही बोले। लाख विरोध करने के बावजूद, उस लड़के को जबरदस्ती राजमहल लाया गया, नहलाया-धुलाया गया, अच्छे साफ-सुथरे कपड़े पहनाए गए और उसका राज्याभिषेक करवाया गया। जब नए राजा का राज्याभिषेक हुआ, तब ही दिवंगत राजा की अर्थी निकल पाई। पहले उसका नाम कुछ और था, अब उसका नामकरण राज परंपरा के अनुसार टोडरशाह रखा गया। यानी राजा दृगपाल शाह के बाद टोडरशाह, उनके पुत्र थे देवी शाह और अब स्वर्गीय देवी शाह के बेटे हैं वर्तमान मंत्री विजय शाह। एक लेखक का आग्रह सिर्फ यह है कि उसके गांव की आदिवासी पारिवारिक पृष्ठभूमि लिए यह लड़का है, अत: भले ही निर्देश दे दिए जाएं कि सारे श्रोता भैंस नहीं हैं, जो जंगल में चरने जाएं? भविष्य में वह सभ्य भाषा और व्यवहार रखे, और चेतावनी देकर मामला रफा-दफा कर दिया जाए।
