अमिताभ श्रीवास्तव
जब तक आप लोग इस खबर को पढ़ेंगे, तब तक उनका मैच हो चुका होगा और वो भी विश्व की नंबर एक खिलाड़ी से। वो टेनिस की मॉडल हैं। दरअसल, पेशेवर टेनिस और मॉडलिंग दोनों उन्हें एक से लगते हैं क्योंकि दोनों में वो आकर्षण है, जिसके पीछे लोग भागते हैं। पांच सालों बाद कई चोटों से उबरने के बाद वो लौटी हैं, वो भी विंबलडन जैसे ऐतिहासिक ग्रैंड स्लेम में। नाम है कार्सन ब्रैनस्टाइन, जिनका मुकाबला कोर्ट नंबर-१ पर टूर्नामेंट की पसंदीदा और विश्व की नंबर एक खिलाड़ी आर्यना सबालेंका से हो चुका होगा। २४ वर्षीय ब्रैनस्टाइन ने टेनिस स्पर्धाओं में लौटने के लिए एक अलग रास्ता अपनाया है। कनाडा की यह खिलाड़ी वर्तमान में विश्व में १९०वें स्थान पर हैं और उन्हें अपने डब्ल्यूटीए टूर वैâरियर के वित्तपोषण के लिए मॉडलिंग जैसे तरीके तलाशने पड़े हैं। यह खूबसूरत खिलाड़ी मॉडलिंग के माध्यम से इतना पैसा कमा लेती हैं कि वह अपने टेनिस खर्च का भुगतान कर पाती हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे शूटिंग के दौरान वैâमरे के सामने रहना पसंद है और यह मजेदार है, क्योंकि मुझे पैâशन पसंद है। यही एक कारण है कि मैं अपनी कुछ यात्राओं का खर्च वहन करने में सक्षम हूं। मैं अपने माता-पिता से कुछ भी नहीं मांगना चाहती थी। मैं चाहती थी कि सब कुछ मुझसे और मेरे टेनिस से मिले।’ वो कहती हैं कि मॉडलिंग और टेनिस एक तरह से समान हैं। आप एक वस्तु की तरह होते हैं और लोग कभी-कभी भूल जाते हैं कि आप एक इंसान भी हैं।’ यह सच है कि उनके ड्रॉ में पहला ही मैच कठिन फंस गया है, जिसमें हारना लगभग तय है। वो कहती हैं एक दिन मुझे मन मुताबिक ड्रॉ मिलेगा।’
एआई ने खाए विंबलडन के जज
विंबलडन टूर्नामेंट के १४८ वर्ष के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि लाइन जज को हटा दिया गया है। उनकी जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को दे दी गई है। लगभग ३०० ब्लेजर पहने हुए अधिकारी जो ‘आउट’ और ‘फॉल्ट’ कहते थे, उन्हें इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के पक्ष में हटा दिया गया है। उनका स्थान हॉक-आई चैलेंज सिस्टम ने ले लिया है, जो गेंद के गिरने पर सटीक नजर रखता है। इसमें उच्च गति वाले वैâमरों और एल्गोरिदम का उपयोग किया गया है। अब जो फाल्ट आदि पर आवाजें आएंगी, वो तकनीक द्वारा विंबलडन में पर्दे के पीछे काम करनेवाले लोगों की हैं, जिनमें टूर गाइड भी शामिल हैं। एआई को अपनाने का निर्णय पिछले वर्ष के टूर्नामेंट में एक पायलट प्रोजेक्ट के बाद लिया गया था। ऐसा माना जा रहा है कि ऑल इंग्लैंड क्लब इसके प्रति अनिच्छुक था, लेकिन इस तकनीक का उपयोग अन्य आयोजनों में वर्षों से किया जा रहा है। स्पर्धा में चेयर अंपायर बने रहेंगे। ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस और क्रोकेट क्लब की मुख्य कार्यकारी सैली बोल्टन ने कहा कि एआई अंपायरिंग में ‘अधिकतम सटीकता’ सुनिश्चित करेगा। मगर ब्रिटिश नंबर ४ बिली हैरिस ने कहा, ‘मुझे यकीन है कि लाइन जजों को याद किया जाएगा। क्योंकि जब वे वहां नहीं होते हैं, तो कोर्ट शांत सा लगता है और वे सभी अच्छे सूट पहने होते हैं। कई लोगों ने इस प्रयोग पर अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। किंतु अब तो इतिहास बन ही गया है और देखना दिलचस्प होगा कि यह सफल रहता है या असफल।
(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार व टिप्पणीकार हैं।)
