ब्रिजेश पाठक
गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (जीएमएलआर) अंतर्गत सुरंग निर्माण के लिए बोरीवली स्थित नेशनल पार्क की १९.४३ हेक्टेयर वन भूमि अब जाकर मनपा को सौंपी गई है। कई महीनों से मनपा इसकी प्रतीक्षा में थी। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि धीमी गति से इजाजत मिलना प्रोजेक्ट के पूरा होने में देरी का कारण बनती है। इसके पहले से ही प्रोजेक्ट में विभिन्न कारणों से देरी हो रही है।
मुंबई के पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों को जोड़ने वाले गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (तृतीय चरण) के अंतर्गत बोरिवली स्थित संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे प्रस्तावित जुड़वां सुरंगों के निर्माण को अब गति मिलने वाली है। प्रत्येक ४.७ किलोमीटर लंबाई और ४५.७० मीटर चौड़ाई वाली इन जुड़वां सुरंगों के लिए आवश्यक १९.४३ हेक्टेयर वनभूमि को मनपा को सौंपने के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अंतिम मंजूरी प्रदान की गई है। मनपा के मुताबिक, इस संबंध में सभी शर्तों का पालन और आवश्यक कार्रवाई मनपा द्वारा शुरू कर दी गई है। लगभग १२.२० किलोमीटर लंबा यह प्रकल्प कुल चार चरणों में पूरा किया जा रहा है।
यात्रा समय में आएगी कमी
अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस पूरे प्रकल्प से पूर्व और पश्चिम उपनगरों के बीच यात्रा का समय ७५ मिनट से घटकर २५ मिनट रह जाएगा, जिससे मुंबईकरों को समय और ईंधन की बचत होगी। साथ ही हर वर्ष लगभग २२,४०० टन कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। जोगेश्वरी-विक्रोली लिंक रोड की तुलना में इस नए लिंक रोड से यात्रा की दूरी लगभग ८.८० किलोमीटर कम हो जाएगी। इसके चलते ईंधन की खपत घटेगी और मुंबई के वायु गुणवत्ता सूचकांक में भी सुधार होगा। इस प्रोजेक्ट की लागत १४ हजार करोड़ आंकी जा रही है।
ये काम है अब तक लंबित
गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड प्रकल्प के चरण ३(अ) में फ्लाईओवर व एलिवेटेड रोटरी का निर्माण अभी बाकी है। जबकि चरण ३(ब) में गोरेगांव स्थित दादासाहेब फालके चित्रनगरी के पास १.२२ किलोमीटर लंबी तीन लेन वाली कट-एंड-कवर सुरंग तथा बोरिवली के नेशनल पार्क के नीचे दो ४.७ किलोमीटर लंबी और ४५.७० मीटर चौड़ी जुड़वां सुरंगों का निर्माण अब तक नहीं किया गया है। लिंक रोड सहित तीसरे चरण की कुल लंबाई ६.६५ किलोमीटर होगी। वहीं ९५ पेड़ों की कटाई का मामला सुप्रीम कोर्ट में फंसा हुआ है।
