-पीड़ितों का सवाल- कब मिलेंगे भूखंड?
सामना संवाददाता / मुंबई
महायुति सरकार के राज में आम जनता बेरोजगारी व महंगाई से तो त्रस्त थी ही, अब अपनी ‘छत’ के लिए भी मारी-मारी फिर रही है। आलम यह है लोकतंत्र में अपनी अहम भूमिका निभानेवाली जनता अब अपने मूलभूत अधिकारों के लिए भी सरकार के आगे लाचार हो गई है। विकास के नाम पर लोगों को जगह-जगह विस्थापित तो किया जा रहा है, लेकिन सालों पहले विस्थापित हुए परियोजना प्रभावितों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। ठीक ऐसा ही मामला द्रोणागिरी से सामने आया है, जहां सिडको परियोजना प्रभावित ५८६ भूखंड धारक पिछले १६ सालों से अपने भूखंड का इंतजार कर रहे हैं।
द्रोणागिरी में भूखंड के लिए लॉटरी निकाली गई है। वहां इंप्रâास्ट्रक्चर न होने के कारण आशय पत्र दिया है और अब यहां परियोजना प्रभावित पूछ रहे हैं कि विकसित भूखंड कब मिलेंगे? इससे पहले २००८ में यानी १६ साल पहले जिन परियोजना प्रभावितों को ड्रॉ में भूखंड दिए जाने थे, उन्हें अभी तक भूखंड पर कब्जा नहीं मिला है। इस कारण द्रोणागिरी ड्रॉ में परियोजना प्रभावितों को भूखंड मिलने को लेकर संशय है।
रायगड के तत्कालीन पालकमंत्री ने दो साल पहले विधानसभा में छह महीने के भीतर ये भूखंड देने का वादा किया था, इसका आज तक क्रियान्वयन नहीं हुआ है। इसके अलावा सिडको ने ११ जून को सेक्टर ६५ में भूखंडों के लिए लॉटरी निकाली है, लेकिन वहां कोई बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। यदि २००८ में निकाले गए भूखंड २०२५ में नहीं मिले तो सेक्टर ६५ में कब मिलेंगे, इसको लेकर लोगों में तरह-तरह की शंकाएं व्याप्त हैं।
५८६ धारकों को अब तक नहीं मिला भूखंड
सिडको ने परियोजना के लिए अपनी सारी जमीनें अधिग्रहित कर ली हैं। अधिग्रहित जमीन के मुआवजे के साथ विकसित भूखंड का १२.५ प्रतिशत देने पर सहमति बनी है। इसके अनुसार, कुछ (बिल्डर से डील करने वाले परियोजना पीड़ितों) को भूखंड दिए जा चुके हैं। लेकिन सिडको द्वारा बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने के कारण २००८ में लॉटरी में आवंटित किए गए ५८६ भूखंड धारकों को १६ साल बाद भी भूखंडों पर कब्जा नहीं मिला।
