ब्रिजेश पाठक
मुंबईकरों का कहना है कि मनपा में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है। प्रोजेक्ट की डेडलाइन आगे बढ़ाकर लागत बढ़ाने का खेल चल रहा है और इस खेल की अगुवाई मुंबई मनपा कर रही है। ताजा मामला दो विज्ञान-केंद्रित संस्थानों को जोड़ने के लिए एक पुल और एक पैदल अंडरपास के निर्माण का है, जो नेहरू विज्ञान केंद्र के पास है। वर्ष २०२२ में मनपा ने इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी किया था, लेकिन लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी काम सिर्फ १४ प्रतिशत ही पूरा हुआ है।
मिली जानकारी के मुताबिक, इसके लिए कार्यादेश अक्टूबर २०२२ में जारी किए गए। मात्र ५७१ मीटर लंबे इस पुल की लागत २६३ करोड़ रुपए तय की गई है। मानसून के महीनों को छोड़कर इस प्रोजेक्ट के लिए २४ महीनों की समयसीमा तय की गई थी, जिसके अनुसार यह पुल मई २०२५ तक पूरा हो जाना चाहिए था। हालांकि, अब इसकी समयसीमा अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है, लेकिन यह संदेहास्पद लगता है, क्योंकि मनपा के वार्षिक बजट में फरवरी २०२५ तक केवल १४ प्रतिशत प्रगति ही दर्ज की गई है।
नागरिकों में नाराजगी
स्थानीय लोगों ने मनपा व ठेकेदार को भ्रष्ट करार दिया है और आरोप लगाया है कि दोनों की मिलीभगत होने की वजह से पुल के निर्माण में देरी हो रही है। मनपा के मुताबिक, यह पुल ई मोसेस रोड (जहां नेहरू विज्ञान केंद्र स्थित है) और वर्ली नाका पर यातायात का दबाव कम करेगा। यह पुल लोअर परेल और करी रोड की ओर से दक्षिण मुंबई या कोस्टल रोड की ओर लोटस जंक्शन के माध्यम से जाने वाले और लौटने वाले वाहनों के लिए सबसे अधिक उपयोगी रहेगा।
शॉर्टकट मार्ग
इसका अर्थ यह होगा कि ई मोसेस रोड या दैनिक शिवनेरी मार्ग से आने वाले वाहन एनी बेसेंट रोड या कोस्टल रोड की ओर जाने के लिए एक शॉर्टकट मार्ग प्राप्त कर सकेंगे और विपरीत दिशा में भी यही सुविधा उपलब्ध होगी। यह भी उम्मीद की जा रही है कि इस पुल के निर्माण से विज्ञान केंद्र में आने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि होगी।
नेहरू विज्ञान केंद्र के नाले के जीजामाता नगर की ओर का कार्य रुका हुआ है क्योंकि वहां एक मस्जिद का शेड पाइलिंग कार्य के लिए आवश्यक मशीनरी की तैनाती में बाधा बना हुआ है। यह शेड क्षेत्र में काम कर रहे एक एसआरए परियोजना के डेवेलपर द्वारा हटाया जाना है, जिसके बाद काम दोबारा शुरू किया जा सकेगा।’
-मनपा अधिकारी, मुंबई महानगरपालिका
