सामना संवाददाता / मुंबई
महारेरा द्वारा घर खरीदारों को मुआवजे के रूप में जारी किए गए करोड़ों रुपए के वसूली आदेशों का क्रियान्वयन पिछले कुछ वर्षों से लंबित है और मुंबई शहर और उपनगर, ठाणे, पुणे, पालघर और रायगड सहित राज्य के पांच जिलों में बड़ी मात्रा में बकाया है। इनमें से सबसे अधिक बकाया मुंबई उपनगरीय जिलों में है और सरकार ने प्रभावी वसूली के लिए वर्तमान में रिक्त पड़े नौ उप जिला मजिस्ट्रेटों को यह जिम्मेदारी सौंपी है। यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार महारेरा वसूली आदेशों को लागू करने के लिए कितनी उत्सुक है।
महारेरा ने घर खरीदारों को कुल ९१२ करोड़ रुपए का मुआवजा मंजूर किया है। इसमें से २२२ करोड़ रुपए वसूले जा चुके हैं और ६८९ करोड़ रुपए वसूले जाने बाकी हैं। इसमें से ६८४ करोड़ रुपए छह जिलों-मुंबई शहर और उपनगर, ठाणे, पुणे, पालघर, रायगड के बकाया हैं। विवरण इस प्रकार है – मुंबई शहर ४० करोड़, मुंबई उपनगर ३२५ करोड़, ठाणे ८१ करोड़, पुणे १७७ करोड़, पालघर २८ करोड़ और रायगड में ३० करोड़ रुपए बकाया हैं।
कार्यान्वयन में हिचकिचाहट
डेवलपर्स द्वारा मुआवजे के रूप में भुगतान की जाने वाली राशि के लिए महारेरा द्वारा वसूली आदेश जारी किए जाते हैं। यह अपेक्षा की जाती है कि संबंधित डेवलपर्स इन वसूली आदेशों को लागू करें। लेकिन वसूली आदेशों को लागू करने में अनिच्छा है। ऐसे मामलों में इन वसूली आदेशों को कार्यान्वयन के लिए संबंधित जिला मजिस्ट्रेटों को भेजा जाता है।
सरकार ने एक आदेश जारी किया और मुंबई शहर और उपनगरों के साथ-साथ ठाणे, पुणे, पालघर और रायगड जिलों के लिए अतिरिक्त जिला कलेक्टरों को समर्पित राजस्व अधिकारी नियुक्त किया। हालांकि, मुंबई उपनगरीय जिले के आदेश में संशोधन किया गया और यह जिम्मेदारी उपनगरों के नौ जिलों के उप जिला कलेक्टरों (अतिक्रमण) को समर्पित राजस्व अधिकारी के रूप में सौंपी गई। चूंकि ये पद वर्तमान में रिक्त हैं इसलिए यह सवाल है कि वसूली आदेशों को वैâसे लागू किया जाएगा।
ये उप कलेक्टर उपनगरीय जिला कलेक्टर कार्यालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसलिए, उनके पास वसूली का अधिकार है। यदि ये पद रिक्त भी हैं तो उन्हें भरा जाएगा और महारेरा के आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।’
-सतीश बागल, निवासी उप कलेक्टर
