सामना संवाददाता / मुंबई
शिक्षकों पर चुनाव आयोग ने चाबुक चलाया है। मुख्य चुनाव अधिकारी एस. चोकालिंगम ने स्पष्ट किया है कि चुनावी ड्यूटी और जनगणना का काम शिक्षकों को करना ही होगा। हालांकि, शिक्षक संघ शिक्षकों को चुनाव कार्य से छूट दिए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि शिक्षकों को अब इस कार्य से छूट नहीं है।
मतदाता सूची को आधुनिक करने के कार्य की तैयारी के लिए मतदान केंद्र स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) की नियुक्ति की गई है। इसमें मुख्य रूप से शिक्षकों को ही लगाया गया है। इससे शिक्षकों और शिक्षक संघों में नाराजगी है। उन्हें अपने मूल प्रतिष्ठान में ही अपना कार्य बनाए रखते हुए यह कार्य ऑनलाइन ही करना है इसलिए एस. चोकालिंगम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी मतदान केंद्र स्तर के अधिकारी को उनके मूल प्रतिष्ठान में कार्य छोड़कर स्थानीय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) कार्यालय में कार्यरत न रखा जाए।
मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के संबंध में विभिन्न विषयों पर मुंबई शहर जिला और मुंबई उपनगरीय जिला में कार्यरत स्थानीय मतदाता पंजीकरण अधिकारी और अन्य चुनाव अधिकारियों की एक बैठक वीरमाता जीजाबाई भोसले वनस्पति उद्यान और चिड़ियाघर (रानी बाग) में आयोजित की गई थी। उन्होंने इस अवसर पर उक्त बातें कहीं। इस अवसर पर सभी संबंधित विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
ऐप से करें काम
चोकालिंगम ने आगे कहा कि भारत के चुनाव आयोग के निर्देशानुसार, प्रत्येक बूथ स्तर पर अलग-अलग मतदान केंद्र स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। मतदान केंद्र स्तर के अधिकारियों को ऐप-आधारित ऑनलाइन सुविधाएं प्रदान की गई हैं इसलिए उन्हें अपने मूल काम पर कोई प्रभाव डाले बिना चुनाव संबंधी काम भी करना चाहिए। साथ ही संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों को उनके स्थापना क्षेत्र में मतदान केंद्र स्तर के अधिकारी (बीएलओ) के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए। यदि ऐसी नियुक्ति अभी तक नहीं की गई है तो संबंधित को अगले दो दिनों में उनके स्थापना क्षेत्र में नियुक्त किया जाना चाहिए, ऐसा भी चोकालिंगम ने निर्देश दिया।
