सूफी खान
ईरान-इजरायल जंग तो खत्म हो चुकी है, तो फिर ईरान अब भी जंगी तैयारियों को अंजाम क्यों दे रहा है? ये सवाल इन दिनों खूब उठ रहा है। एक्सपर्ट कहते हैं कि ये तैयारी ईरान इसलिए कर रहा है, क्योंकि अगर सीजफायर टूटता है तो इजराइल पहले की तरह ईरान को नुकसान न पहुंचा पाए। इसके लिए सबसे पहले ईरान ने मोसाद के नेटवर्क को खत्म करने का मिशन शुरू कर दिया है। पूरे ईरान में सर्च अभियान चल रहा है। ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां हो रही हैं। एक ही दिन में ५० से ज्यादा संदिग्ध पकड़े गए। दूसरी तरफ ईरान ने समुद्र में अमेरिका से निपटने की तैयारी भी शुरू कर दी है। फारस की खाड़ी में मौजूद कच्चे तेल के अहम समुद्री रास्ते होर्मुज की तरफ माइंस रवाना की गई हैं, ताकि जरूरत पड़ते ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया जा सके।
चर्चा होती है कि ईरान में मोसाद का नेटवर्क पैâला हुआ है। अपनी ही जमीन पर जासूसों के जाल से निपटना ईरान के लिए बड़ा चैलेंज है। माना जा रहा है कि ईरान मोसाद के हमलों का बदला लेना चाहता है, क्योंकि मोसाद ने भी छिपकर वार किया था। इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद लगातार सीक्रेट तरीके से हमला करती है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो ईरान को शक है कि मोसाद एजेंट ईरानी समुद्र में पकड़ बना रहे हैं, खासतौर पर ईरान के बंदरगाहों पर मोसाद घुस चुका है। कहा तो ये भी जा रहा है कि इसी वजह से समुद्र में माइंस ले जाने का ईरानी प्लान खुल गया था। खुलासा भी हो चुका है। मोसाद ने सोशल मीडिया के जरिए चौंकाया था कि उसे ईरान के सीक्रेट वॉर कमांडर की पूरी जानकारी मिल चुकी है।
एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान होमुर्ज स्ट्रेट को डेंजर जोन में बदलने की प्लानिंग कर रहा है। इसका मतलब ये हुआ कि यहां ईरान के युद्धपोत रास्ता नहीं रोकेंगे, बल्कि ऐसी तैयारी होगी कि कोई भी जहाज यहां से गुजरने की हिम्मत नहीं कर सकेगा। अमेरिका के मुताबिक, ईरान इस बार दुनिया को ब्लैकमेल करने के प्लान में है, जिसके लिए होमुर्ज स्ट्रेट बंद करके ईरान गैस-तेल की सप्लाई को रोक देगा। ईरान पर हमला होते ही तेल के लिए हाहाकार मच जाएगा। ईरान अमेरिका और इजरायल के खिलाफ पूरी दुनिया पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा। ईरान जानता है कि होमुर्ज बंद होते ही दुनिया के सामने अमेरिका को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।
स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज से दुनिया भर के लिए कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। दुनिया को सप्लाई होने वाला एक तिहाई एलएनजी भी इसी रास्ते से गुजरता है। इस रास्ते को ग्लोबल इकोनॉमी की नाजुक नस भी कहा जाता है, अगर ईरान इस समुद्री रास्ते को रोक दे तो दुनिया भर के ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल हो सकती है।
