मुख्यपृष्ठनए समाचारमहाराष्ट्र में छात्र भी नहीं सुरक्षित...स्टूडेंट सुसाइड मामले में महाराष्ट्र नं.-१

महाराष्ट्र में छात्र भी नहीं सुरक्षित…स्टूडेंट सुसाइड मामले में महाराष्ट्र नं.-१

– सायबर बुलिंग की भी चपेट में आ रहे हैं बच्चे

– सत्ता पक्ष की महिला सदस्य ने सरकार पर उठाई उंगली

-तनाव, परीक्षा में असफलता, पारिवारिक कलह, यौन अत्याचार बन रहे कारण

सामना संवाददाता / मुंबई

पूरे हिंदुस्थान में छात्र-छात्राओं की आत्महत्या के मामले बढ़े हैं। इसमें महाराष्ट्र नंबर वन पर पहुंच गया है। इसका मुख्य कारण शैक्षणिक तनाव, परीक्षा में असफलता, पारिवारिक कलह, यौन उत्पीड़न, ऑनलाइन ट्रोलिंग और मानसिक स्वास्थ्य बताया जा रहा है। सबसे चौंकानेवाली बात यह है कि बच्चे सायबर बुलिंग की भी चपेट में आ रहे हैं। इस तरह का मुद्दा उपस्थित कर सत्ता पक्ष की भाजपा सदस्य चित्रा वाघ ने अपनी ही सरकार की कार्यशैली पर उंगली उठाई। साथ ही उनके साथ कई अन्य सदस्यों ने कई कारगर उपाय सुझाए। इसका जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री पंकज भोयर ने कहा कि विधायकों के सुझावों पर संज्ञान लेते हुए निश्चित तौर पर रास्ता निकालेंगे।
एक लाख से अधिक स्कूल मात्र ३५७ काउंसलिंग केंद्र!
विधान परिषद में प्रश्नोतर काल के दौरान भाजपा सदस्य चित्रा वाघ ने कहा कि सुसाइड करनेवाले छात्रों में १० से १८ आयु वर्ग के बच्चे शामिल हैं। इस आयु वर्ग में आत्महत्या का प्रतिशत महाराष्ट्र में सबसे अधिक है। दूसरी तरफ राज्य में एक लाख से अधिक स्कूल हैं, लेकिन काउंसलिंग केंद्र केवल ३५७ ही हैं। यह स्थिति चिंताजनक है। वाघ ने सवाल किया कि छोटे बच्चों में आत्महत्या की घटनाएं रोकने के लिए सरकार ने क्या नीति बनाई है।
इस पर स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री पंकज भोयर ने बताया कि बच्चों की काउंसलिंग के लिए विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं और विधायकों द्वारा दिए गए सुझावों को ध्यान में रखते हुए एक ठोस मार्ग निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि बच्चों में पढ़ाई में सफलता-असफलता, माता-पिता का डांटना, भूख हड़ताल, मोबाइल व इंटरनेट जैसी वजहों से निराशा की भावना पैदा हो रही है और वे आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं। अब तक कितने बच्चों ने आत्महत्या की है, इसकी जिलेवार जानकारी सरकार को देनी चाहिए। साथ ही उन्होंने मांग की कि काउंसलिंग केंद्रों का दायरा बढ़ाकर बच्चों का मानसिक दृष्टिकोण बदलने के लिए नीति तैयार की जाए।
तनाव प्रबंधन के लिए वेबिनार, शिक्षकों द्वारा काउंसलिंग
राज्यमंत्री पंकज भोयर ने सदन को बताया कि नौवीं से बारहवीं के विद्यार्थियों को शैक्षणिक विषयों के साथ भविष्य के करियर अवसरों और परीक्षाओं के दौरान आने वाले तनाव का प्रबंधन करने के लिए ऑनलाइन वेबिनॉर आयोजित किए जाते हैं। शिक्षकों के माध्यम से काउंसलिंग की जाती है। स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं और विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं।

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