एम एम एस
वाह! क्या टाइमिंग है। एक तरफ हम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वर्षगांठ मना रहे हैं, उन घावों को याद कर रहे हैं जो सरहद पार से मिले थे, और दूसरी तरफ हमारी उदारता का आलम देखिए, हमने उनके लिए रेड कार्पेट बिछा दिया है। इसे कहते हैं ‘मास्टरस्ट्रोक’! सीमा पर गोलियां झेलने वालों के सम्मान में हम पाकिस्तानी खिलाड़ियों को भारत की बिरयानी खिलाने का बंदोबस्त कर रहे हैं।
पहलगाम में २२ अप्रैल को सैलानियों पर हुए हैवानियत भरे हमले को याद कर देश की आंखें नम थीं। हमने कसम खाई थी कि जब तक पड़ोसी अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आता, तब तक ‘बैट-बॉल’ तो क्या, कंचे भी साथ नहीं खेलेंगे। लेकिन शायद राजनीति के मैदान में सिद्धांतों की पिच’ बड़ी जल्दी क्यूरेट कर दी जाती है। याद है वो दिन जब पाकिस्तान की हरकतों के विरोध में खालिस देशभक्तों ने पिच उखाड़ दी थी? आज उसी पिच पर पाकिस्तानी खिलाड़ियों को ‘सशर्त’ दावत दी जा रही है। तर्क दिया जा रहा है कि भाई, द्विपक्षीय सीरीज तो नहीं खेलेंगे, बस मल्टी-नेशन टूर्नामेंट में उनका स्वागत करेंगे। मतलब, अगर दो लोग लड़ रहे हों तो घर नहीं बुलाएंगे, लेकिन अगर मोहल्ले की पार्टी हो तो उसी दुश्मन को बगल वाली कुर्सी पर बिठाकर पनीर टिक्का खिलाएंगे? यह लॉजिक तो किसी ‘कॉमेडी सर्कस’ के स्क्रिप्ट जैसा है।
२०२६ के वर्ल्ड कप में जब पाकिस्तान ने नखरे दिखाए और हमें श्रीलंका जाकर खेलना पड़ा, तो लगा था कि अब ईंट का जवाब पत्थर से मिलेगा। पर यहां तो जवाब में ‘वीजा’ मिल रहा है। सरकार कहती है,हम वहां नहीं जाएंगे, पर वो यहां आ सकते हैं। यह तो वही बात हुई कि ‘तुमने हमारे घर का पानी बंद किया, तो क्या हुआ? हम तुम्हें अपने घर का जूस पिलाएंगे।’
सिंदूर के बलिदानों के बीच यह खेल का ‘तोहफा’ जनता के गले नहीं उतर रहा। क्रिकेट के दीवानों के लिए यह ‘हाई-वोल्टेज’ मुकाबला हो सकता है, लेकिन उन मांओं से कौन पूछेगा जिन्होंने सरहद पर अपना ‘लाल’ खोया है? क्या स्टेडियम की तालियों का शोर उन चीखों को दबा पाएगा? ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वर्षगांठ पर यह पैâसला किसी तोहफे से कम नहीं है, बस फर्क इतना है कि यह तोहफा उन बलिदानों का मजाक उड़ा रहा है। खेल का मैदान सजेगा, सट्टे बाजार में करोड़ों उड़ेंगे, और सरहद पर तिरंगे में लिपटे ताबूतों का हिसाब एक बार फिर ‘मल्टी-नेशन’ वाली फाइलों में दब जाएगा। और इलेक्शन आते ही ‘पाकिस्तान को खत्म कर देंगे’ जैसे फिल्मी डायलॉग शुरू कर देंगे!
