सामना संवाददाता / मुंबई
विधानसभा में अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे चेतन तुपे की एक शायरी ने बवाल मचा दिया। विपक्ष ने उन्हें आड़े हाथों लेते हुए जमकर फटकार लगाई और उन्हें पद से हटाने की मांग की। तालिका अध्यक्ष चेतन तुपे की टिप्पणी पर विपक्ष ने आक्रोशित होकर तीव्र आपत्ति जताई। विपक्ष ने कहा कि राजनीतिक बयान देने वालों को अध्यक्ष पद पर रहने का अधिकार नहीं है और तुपे के खिलाफ कार्रवाई की मांग विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से की।
बता दें कि सदन में किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष ने २९३ के तहत प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव पर बोलने के लिए विपक्ष ने अपने सदस्यों के नाम दिए थे। लेकिन कुछ विधायक उपस्थित न होने पर तालिका अध्यक्ष चेतन तुपे ने राजनीतिक कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने तीन दिन हंगामा किया और अब यह प्रस्ताव रखा। ध्यानाकर्षक सूचना दिए बिना ही चर्चा की जिद कर रहे हैं। मंत्री और सत्ताधारी विधायक चर्चा के लिए मौजूद हैं, लेकिन विपक्ष के लोग भूख लगने पर सदन से बाहर चले जाते हैं।
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि गुरुवार और शुक्रवार की सुबह के सत्र में चेतन तुपे तालिका अध्यक्ष थे और उन्होंने विपक्ष के बारे में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। वडेट्टीवार ने तुपे के कुछ वाक्य पढ़कर सुनाए और पूछा कि अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठकर सरकार का पक्ष रखना उन्हें किस अधिकार से मिला?
शिवसेना विधायक भास्कर जाधव ने कहा कि अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठकर तालिका अध्यक्ष ने जो बयान दिए, उसका मतलब यही है कि वे अध्यक्ष के ही बयान माने जाते हैं और वही अध्यक्ष की भूमिका होती है। इसलिए तुपे को कड़े शब्दों में समझाया जाना चाहिए। कांग्रेस के नाना पटोले ने कहा कि अध्यक्ष की कुर्सी की पवित्रता ऐसे बयानों से कम होती है, यह खेदजनक है।
