मुख्यपृष्ठस्तंभलाखों के जीवन रक्षक सेठ गोकुलदास तेजपाल

लाखों के जीवन रक्षक सेठ गोकुलदास तेजपाल

सेठ गोकुलदास तेजपाल दानी-धर्मी होने के साथ ही समाज सुधारक भी थे। मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय के ठीक बगल में स्थित गोकुलदास तेजपाल (जी.टी.) अस्पताल उन्हीं की देन है।

विमल मिश्र

तेजपाल रोड (पूर्व नाम बॉम्बे इंप्रूवमेंट ट्रस्ट रोड)। ग्रांट रोड की खामोश सी सड़क। इक्का-दुक्का वाहन और आने-जाने वालों में अलग से नजर आनेवाले विदेशी चेहरे, जिनमें अमूमन सभी मणि भवन देखने आए हैं – स्वतंत्रता आंदोलन के दिनों में महात्मा गांधी का निवास स्थान। चंद मिनटों की दूरी पर है गिरगांव चौपाटी और अगस्त क्रांति मैदान।
यहां रहनेवाले ही बहुत से लोगों तक को नहीं पता इस स्थान का महत्व। इस जगह देश के इतिहास ने करवट बदली है। यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की जन्मभूमि है। वह जगह जहां गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय और छात्रावास में ए.ओ. ह्यूम ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली बैठक २८ दिसंबर, १८८५ को आयोजित की थी। इस बैठक में ७२ प्रतिनिधि जुटे थे, जिन्होंने वोमेश चंद्र बनर्जी को कांग्रेस का पहला अध्यक्ष चुना था।
यह सड़क है परोपकारी धनकुबेर सेठ सर गोकुलदास तेजपाल (१८२२-१८६७) के नाम पर। यहीं है गोकुलदास तेजपाल दीर्घा-प्रदर्शनियों की लोकप्रिय जगह, जबकि सेठ गोकुलदास तेजपाल ऑडिटोरियम गुजराती समुदाय के रसिक दर्शकों के बीच लोकप्रिय नाटकों के स्टेज शो देखने का सबसे मशहूर ठिकाना है। गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज और छात्रावास की जगह अब ऊंची इमारतों ने ले ली है। इन सबका प्रबंध सेठ गोकुलदास तेजपाल चैरिटीज द्वारा किया जाता है।
मथुरादास विसानजी मेमोरियल हॉल के बाहर मटमैले हो चले सफेद संगमरमर के एक फलक को छोड़ दें तो भारतीय इतिहास के इस गौरवपूर्ण स्थान का बखान करने को अब यहां ज्यादा कुछ नहीं बचा। ये जगहें अब विशाल गोकुलदास तेजपाल परिसर का हिस्सा हैं, जिसमें एक बोर्डिंग स्कूल और कछुओं से भरा एक कुआं भी शामिल है।
समाज सुधार और दानी-धर्मी
सेठ तेजपाल की दूसरी स्मृति है मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय के ठीक बगल में स्थित गोकुलदास तेजपाल (जी.टी.) अस्पताल। मुंबई जब महामारियों की चपेट में थी और स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी का सामना कर रही थी, मुंबई के उस जमाने के सबसे रईस रुस्तमजी जमशेदजी जीजीभॉय ने प्रस्ताव रखा कि अगर ब्रिटिश सरकार १० हजार पाउंड का योगदान करे तो वे अपनी तरफ से १५ हजार पाउंड देकर मुंबईवासियों के लिए एक अस्पताल बनवाने को तैयार हैं। रुस्तमजी किसी कारणवश अपने वचन की टेक नहीं रख पाए, तब यह राशि देकर अस्पताल को खड़ा करने में मदद की सेठ तेजपाल ने।
सेठ गोकुलदास तेजपाल का जन्म १८२२ में गुजरात के कच्छ में गुजराती भाटिया समुदाय के एक घराने में हुआ। कम उम्र में ही उन्हें मुंबई आना पड़ा था, जहां पिता सेठ तेजपाल और चाचा छोटी उम्र में ही फेरीवाले के रूप में जीविका कमाने में लगे थे। १७ वर्ष में ही पिता की छाया सिर से उठ जाने के कारण परिवार की जिम्मेदारी उन पर आ पड़ी। उनके चाचा ने भी मृत्यु से पहले अपनी संपत्ति उनके नाम कर दी। धीरे-धीरे अपनी कारोबार बुद्धि से उन्होंने कपड़ों के व्यवसाय में अपना एक बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया।
१८६७ में निधन से पहले अपने अकूत धन का उपयोग सेठ तेजपाल ने गोकुलदास तेजपाल एंग्लो-वर्नाक्यूलर हाई स्कूल व गोकुलदास तेजपाल बोर्डिंग हाउस सहित शिक्षा संस्थानों, छात्रावासों और अस्पतालों व अन्य धर्मार्थ संस्थानों की स्थापना में किया। सेठ तेजपाल की जन्मभूमि कच्छ में भी उनके नाम से एक स्कूल है। सेठ तेजपाल ने समाज सुधारक के रूप में भी ख्याति कमाई, विशेषकर स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में। जिस समय मुंबई में बिजली का प्रवेश नहीं हुआ था यहां स्ट्रीट लाइट्स लगवाने में उनका योगदान सबसे बड़ा माना जाता है।
कांग्रेस हाउस
तेजपाल रोड से कुछ ही दूरी पर ग्रांट रोड के विट्ठल भाई पटेल मार्ग पर स्थित है कांग्रेस हाउस, जो किसी ‌जमाने में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का मुख्यालय होता था। महात्मा गांधी के ‘सविनय अवज्ञा’ और ‘भारत छोड़ो’ का केंद्रस्थल, जहां स्वतंत्रता आंदोलन के शीर्ष राष्ट्रीय नेता और आजादी के परवाने यहां एकत्र हुआ करते। देश की आजादी संबंधी बहुत से महत्वपूर्ण निर्णय यहां किए गए। कांग्रेस हाउस के नीचे एक ‘कांग्रेस रेस्त्रां’ भी है, जो हमेशा गोरी पुलिस की निगरानी में रहा।
(लेखक ‘नवभारत टाइम्स’ के पूर्व नगर संपादक, वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं।)

अन्य समाचार