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मैं ब्रेकअप बर्दाश्त नहीं कर सकती!-फातिमा सना शेख

कमल हसन की फिल्म ‘चाची ४२०’ अपना करियर शुरू करनेवाली फातिमा सना शेख ने आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ में गीता फोगाट का किरदार निभाया था। खैर, ‘ठग्स ऑफ हिंदुस्तान’, ‘लूडो’, ‘सैम बहादुर’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुकीं सना नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘आप जैसा कोई’ से चर्चा में बनी हैं। पेश है, फातिमा सना शेख से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
फिल्म ‘आप जैसा कोई’ और ‘मेट्रो इन दिनों’ के बारे में आप क्या कहेंगी?
कलाकारों की यह धारणा होती है कि उनकी दो फिल्में एक साथ रिलीज न हों, ताकि उनके पैंâस डिवाइड न हों, लेकिन मैं खुद को इस मामले में बेहद खुशनसीब मानती हूं कि मेरी फिल्में ‘मेट्रो इन दिनों’ और ‘आप जैसा कोई’ लगभग एक साथ रिलीज हुई। दोनों ही फिल्मों में निभाए गए मेरे अलग किरदार मेरे चाहनेवालों के लिए एक तोहफा ही है। ‘आप जैसा कोई’ एक मैच्योर रोमांटिक फिल्म है तो ‘मेट्रो इन दिनों’ आज के जीवन का आईना है। खैर, अब मुझे ब्रेक की जरूरत है।
फिल्म ‘आप जैसा कोई’ के बारे में कुछ बताएंगी?
फिल्म के लेखक और निर्देशक विवेक सोनी हैं। फिल्म के किरदार न केवल कॉमन हैं, बल्कि उनके मनमुटाव भी काफी कॉमन हैं। मैं ऐसा इसलिए कह रही हूं, क्योंकि अधेड़ उम्र की शादियां होना अपने देश में आसान नहीं है। शादियां ३० तक हो जानी चाहिए, ऐसा समाज मानता है। लड़की की उम्र ३० और लड़के की उम्र ३५ पार करने के बाद उनकी उम्र को मैच करनेवाली जोड़ी कहां आसानी से मिलती है? बहुत समझौते करने पड़ते हैं। ‘आप जैसा कोई’ करने में बहुत मजा आया। इसमें आर. माधवन मेरे को स्टार रहे हैं।
कोलकाता में शूटिंग करना कितना अलग रहा?
इस फिल्म की शूटिंग करने से पहले मैं कभी कोलकाता नहीं गई थी। इस शहर का अपना एक खास कल्चर है। कोलकाता में रहना और काम करना मुझे बड़ा अच्छा और खास लगा।
वास्तविक जीवन में क्या आपको प्यार और शादी होना आसान लगता है?
प्यार में समझौते करना तो लाजिमी है। हमारे भारत में अनगिनत ऐसे दंपति हैं, जिन्होंने एक-दूसरे के प्यार की खातिर अनगिनत समझौते किए, परंतु ‘ब्रेकअप’ नहीं किया। लेकिन बदलते वक्त के साथ प्रेमी जोड़े आज समझौते करना पसंद नहीं करते और उसका हश्र होता है ‘ब्रेकअप!’ मैं ब्रेकअप बर्दाश्त नहीं कर सकती। ब्रेकअप की कल्पना से ही मुझे घबराहट होती है। हां, जब दो लोग प्यार करते हैं तब कई तरह की परेशानियां और गलतफहमियों का उन्हें सामना करना पड़ता है।
क्या आप अपने से बड़ी उम्र वाले युवक से प्यार कर सकती हैं?
क्यों नहीं? मेरे माता-पिता की उम्र में भी फासला था, लेकिन वो एक-दूजे से प्यार कर बैठे। यह कोई गलत बात नहीं है। आज के इस दौर में स्त्री और पुरुष एक समान है, इस बात को अधोरेखित करना होगा।
क्या आपका किरदार फेमिनिज्म का है?
मैं फेमिनिस्ट नहीं हूं। मैं यह नहीं मानती कि समाज में स्त्री सबसे बढ़कर है। स्त्री और पुरुष समाज और परिवार के दो पिलर हैं। इन दोनों पहियों के बिना न तो समाज आगे बढ़ सकता है और न ही घर। शारीरिक रूप से अगर पुरुष बलशाली है तो स्त्री मानसिक रूप से स्ट्रॉन्ग है।
फिल्म ‘दंगल’ के बाद आपकी जिंदगी में कितना बदलाव आया?
फिल्म ‘दंगल’ में मेरे द्वारा निभाए गए गीता फोगाट के किरदार को काफी लोकप्रियता मिली और आम दर्शकों से इस किरदार ने काफी रिलेट किया। इस फिल्म की सफलता के बाद मिले हर ऑफर को न स्वीकारते हुए मैंने सोच-समझकर फिल्में साइन कीं। वैसे तो हमारा परिवार जम्मू का रहनेवाला है, लेकिन मेरे करियर की वजह से मैं, मेरे माता-पिता और मेरा भाई मुंबई में रहते हैं। जब मैं फिल्म ‘आप जैसा कोई’ की शूटिंग के सिलसिले में कोलकाता गई तो वहां पहली बार मैंने अपने ननिहाल के लोगों के साथ काफी वक्त गुजारा। मम्मी के रिश्तेदार कोलकाता में रहते हैं। इतना बड़ा परिवार देखकर मैं अचंभित हो गई। मुंबई में हम सिर्फ चार लोग हैं और मुंबई जैसे शहर में हमारा पड़ोसियों के साथ कोई इंटरैक्शन नहीं होता। मुंबई में हमारा अपना कोई नहीं इसलिए जब कोलकाता गई तो अनगिनत प्यारी यादों का बेशकीमती खजाना अपने साथ ले आई। फिल्म ‘आप जैसा कोई’ में बड़े परिवार और उसके आपसी रिश्तों की तरह मेरे लिए संयुक्त परिवार की अहमियत और भी गहरी हो गई।

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