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सावन के दूसरे सोमवार को विश्वनाथ मंदिर में हजारों यादव-बंधुओं ने किया जलाभिषेक, निभाई वर्षों पुरानी परंपरा

 

उमेश गुप्ता/वाराणसी

सावन के दूसरे सोमवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर एक विशेष धार्मिक आयोजन का साक्षी बना। सीर गोवर्धनपुर के हजारों यादव बंधुओं ने पारंपरिक रूप से गंगाजल से बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। यह परंपरा पिछले कई दशकों से जारी है, जो आज भी पूरे श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई जा रही है।

सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर परिसर के बाहर लग गई थीं। हर-हर महादेव के गगनभेदी उद्घोष से संपूर्ण वातावरण शिवमय हो गया। यादव समाज के सदस्य अस्सी घाट से गंगाजल भरकर केदार घाट होते हुए नंगे पांव मंदिर पहुंचे और विधिवत जलाभिषेक किया।

समाजसेवी सुनील कुमार यादव ने बताया कि जब से काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित विश्वनाथ मंदिर का निर्माण हुआ है, तब से यह परंपरा लगातार जारी है। सावन के पहले सोमवार को पुराने विश्वनाथ मंदिर में और दूसरे सोमवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय मंदिर में जलाभिषेक होता है।

वार्ड नंबर 23 के प्रसाद राम सिंह ने बताया कि इस यात्रा की शुरुआत सीर गोवर्धनपुर से होती है। श्रद्धालु नंगे पांव चलते हुए अस्सी घाट पहुंचते हैं, वहां गंगास्नान करके कलश में जल भरते हैं और मंदिर पहुंचकर भगवान शिव को अर्पित करते हैं।

यह धार्मिक आयोजन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि समाज में आस्था और एकता का भी प्रतीक है। हजारों की संख्या में यादव बंधुओं का एकसाथ चलना, शिवभक्ति में लीन होना और बाबा को जल अर्पित करना, वाराणसी की सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूती देता है।

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