खुशबू सिंह
प्रयागराज के महाकुंभ में हाल ही में हुए शाही स्नान के दिन भगदड़ ने कई परिवारों को झकझोर दिया। दर्जनों श्रद्धालुओं की जान गई और कई लोग लापता हो गए। इन्हीं लापता लोगों में से एक नाम था खूंटी गुरु का।
तेरहवीं में हुई अचानक वापसी
दरअसल, खूंटी गुरु २८ जनवरी को मौनी अमावस्या पर अमृत स्नान करने निकले थे। २९ जनवरी को संगम नोज पर भगदड़ मच गई, जिसके बाद से उनका कुछ पता नहीं चला। मोहल्ले वालों ने हर जगह तलाश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो सबने मान लिया कि वो अब इस दुनिया में नहीं रहे। ११ फरवरी को उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना सभा आयोजित की गई और तेरहवीं के ब्रह्मभोज की तैयारियां शुरू हो गईं, लेकिन उसी शाम अचानक ऑटो से उतरकर मुस्कुराते हुए खूंटी गुरु सामने खड़े हो गए।
उनकी वापसी देख सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं। मातम का माहौल कुछ ही मिनटों में खुशी में बदल गया। मोहल्ले वालों ने तेरहवीं के लिए बनाई पूड़ी, सब्जी और पकवान बांटकर उनकी ‘मौत से वापसी’ पर जश्न मना लिया।
आखिर कहां थे खूंटी गुरु?
जब उनसे पूछा गया कि इतने दिन कहां रहे, तो खूंटी गुरु ने खुलासा किया कि महाकुंभ में उनकी मुलाकात साधुओं के एक समूह से हो गई थी। वहीं उन्होंने उनके साथ चिलम पी और गहरी नींद में चले गए। जागने के बाद वो नागा साधुओं के साथ रहने लगे और कुछ दिनों तक लोगों की सेवा और भोजन परोसने का काम किया। जब मन भर गया तो उन्होंने मोहल्ले की ओर लौटने का पैâसला किया।
परिवार नहीं, मोहल्ला ही है परिवार
खूंटी गुरु का कोई अपना परिवार नहीं है। उनके पड़ोसी और मोहल्ले वाले ही उनका परिवार हैं। यही वजह रही कि उनके लापता होने पर पूरा मोहल्ला शोक में डूब गया था, लेकिन उनके जिंदा लौट आने के बाद उसी मोहल्ले ने उन्हें गले लगाकर एक नई जिंदगी का उत्सव मनाया।
महाकुंभ के इतिहास में ये वाकया लंबे समय तक याद किया जाएगा। जहां भगदड़ ने कई परिवारों को हमेशा के लिए दर्द दिया, वहीं खूंटी गुरु की अचानक वापसी ने ये साबित कर दिया कि जिंदगी कभी भी अप्रत्याशित मोड़ ले सकती है।
