पड़ोसी देश नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर सरकार के प्रतिबंध के खिलाफ भड़की हिंसा की आग गंभीर है। यह आग इतनी भीषण है कि आखिरकार प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को इस्तीफा देना पड़ा है। नेपाल में जन-आंदोलन इतना तीव्र हो गया है कि हिंसक भीड़ ने उप-प्रधानमंत्री विष्णु प्रसाद पौडेल को सड़क पर पीट डाला। कई मंत्रियों के घरों में आग लगा दी गई है। पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ के आवास में भी आग लगा दी गई, जिसमें उनकी पत्नी राजलक्ष्मी की मौत हो गई। नेपाल में लाखों युवा सड़कों पर उतर आए हैं। वे संसद में भी घुस गए। प्रधानमंत्री ओली और अन्य मंत्रियों के घरों में घुसने की कोशिश की गई। पुलिस की गोलीबारी में २० युवक मारे गए हैं। नेपाल कभी दुनिया का एकमात्र हिंदू राष्ट्र था। आज यह राष्ट्र चीन के नियंत्रण में है और नेपाल लगातार भारत के खिलाफ कारस्तानी करता रहता है। प्रधानमंत्री ओली ने पिछले हफ्ते चीन में शंघाई शिखर सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने पुतिन जैसे बड़े नेताओं से मुलाकात की। जब वे लौटे, तो जनता का आक्रोश भड़क उठा। ऐसा क्यों हुआ? नेपाल सरकार ने ३ सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हॉट्सऐप और एक्स जैसे २६ सोशल मीडिया ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया। सरकार का कहना है कि इन कंपनियों ने नेपाल सरकार के आईटी मंत्रालय में पंजीकरण नहीं कराया है इसलिए नियमानुसार कार्रवाई की गई है, लेकिन विरोधी दलों का कुछ अलग ही कहना है। सोशल मीडिया में सरकार के खिलाफ हवा बहने लगी थी। लोगों में असंतोष पैदा हो गया था। उसे दबाने के लिए नेपाल सरकार ने इन सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया और नेपाल के युवा इसके खिलाफ उन्माद में सड़कों पर उतर आए। इस आंदोलन को ‘जेन जेड रेवोल्यूशन’ नाम दिया गया और युवाओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
युवाओं के हाथों में
‘भ्रष्टाचार बंद करो, सोशल मीडिया नहीं’, ‘युवा विरुद्ध भ्रष्टाचार’ जैसे लिखे गए नारों की तख्तियां थीं। इसका मतलब यह आक्रोश नेपाल सरकार की तानाशाही, भ्रष्टाचार और मनमानी के खिलाफ है। नेपाल हिमालय की गोद में बसा एक राष्ट्र है। पहले नेपाल में राजतंत्र था। वहां की जनता नेपाल के राजा को विष्णु का अवतार मानती थी। उस विष्णु के अवतार के खिलाफ लोगों ने आंदोलन किया और उसे हटा दिया। क्योंकि विष्णु के राज्य में भी भ्रष्टाचार और भुखमरी व्याप्त थी। फिर जनता ने कम्युनिस्टों का शासन स्थापित किया। वह भी वैसी ही निकली, लेकिन वहां की जनता में सड़कों पर उतर कर भ्रष्ट सरकार के खिलाफ विद्रोह करने का जिगर है। यह राष्ट्र भारत की सीमा पर है। सीमा पर स्थित लगभग हर देश में विद्रोह भड़क उठे। श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में भी यही स्थिति है। जनता ने श्रीलंका और बांग्लादेश की सरकारों को इसलिए उखाड़ फेंका क्योंकि भ्रष्टाचार असहनीय हो गया था। जब लोगों के मन में स्वाभिमान की चिंगारी सुलगती है, तो उसे भड़कने में देर नहीं लगती। फिर लोग बंदूकों और तोपों की भी परवाह नहीं करते। नेपाल में भूख, भय और भ्रष्टाचार का बोलबाला है और वहां की राजनीतिक व्यवस्था इसे रोकने में नाकाम रही है। संसद लोगों के किसी काम की नहीं है। ऐसे समय में, लोग देश को तानाशाही की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए मरने-मारने को तैयार हैं। नेपाल में भी यही हो रहा है। वहां हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और हिंसा भड़क उठी। नेपाली सरकार को इस आक्रोश को रोकने के लिए अंतत: सेना तैनात करनी पड़ी। नेपाल के गृह मंत्री रमेश लेखक ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया है, लेकिन जनता प्रधानमंत्री केपी ओली का इस्तीफा चाहती थी। नेपाल में लगातार सरकारें आती और गिरती रहती हैं। लोग रोटी, कपड़ा, मकान और रोजगार के लिए तरस रहे हैं। बड़ी संख्या में नेपाल की जनता भारत में नौकरी कर रही है, लेकिन चीन का नेपाल पर पूरा नियंत्रण है। नेपाल की अर्थव्यवस्था चीन की मदद पर निर्भर है। एक समय नेपाल, भूटान जैसे देश भारत के
विश्वसनीय मित्र
थे। जब नेपाल में कोई नई सरकार आती है, तो प्रधानमंत्री सबसे पहले भारत का दौरा करते हैं। आज नेपाल के प्रधानमंत्री पहले चीन जाते हैं और फिर पाकिस्तान। यह भारत की विदेश नीति की विफलता है। सैकड़ों चीनी शिक्षक इस समय नेपाल में हैं और नेपाल के लोग उनसे चीनी भाषा की शिक्षा ले रहे हैं। पहले नेपाल का रंग भगवा था। अब यह पूरी तरह से चटक लाल हो गया है और भारत सरकार इस बदलाव को रोक नहीं पाई। नेपाल की हिम्मत इस कदर बढ़ गई है कि वह दावा करने लगा है कि भारत ने उसकी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है वह इसलिए क्योंकि भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर हो गया है। एक जमाने में नेपाल के शासक कहते थे, ‘भारत हमारे साथ है। भारत हमारा बड़ा भाई है।’ आज चीन ने भारत की जगह ले ली है और जहां नेपाल में असंतोष की आग सुलग रही है, वहीं भारत बाड़े पर बैठा है। नेपाल की आग भूख और बेरोजगारी की चिंगारी है। भारत को इससे सबक लेना चाहिए। भारत में रोजगार नष्ट हो गया है। ८० करोड़ लोगों को सरकार द्वारा मुफ्त में दिए जाने वाले पांच से दस किलो ‘राशन’ पर गुजारा करना पड़ रहा है। मोदी-शाह लोकतंत्र को खत्म करके चुनाव जीत रहे हैं। लोकतंत्र के सभी स्तंभ ढहते नजर आ रहे हैं। धर्म और जाति की राजनीति चरम पर पहुंच गई है। ये सभी विकार देश के लिए खतरनाक हैं। नेपाल से लेकर बांग्लादेश तक, सीमा पर बसे सभी देश तानाशाही के खिलाफ लड़ रहे हैं। जब जनता सड़कों पर उतरती है, तो हुक्मरान उन पर बंदूकों और तोपों से बमबारी करते हैं। नेपाल में भी यही हो रहा है। बांग्लादेश और श्रीलंका में भी यही हुआ। नेपाल की आग लोकतंत्र की रक्षा और भ्रष्ट सरकार के खिलाफ है। काठमांडू की सड़कें क्रांतिकारी युवाओं के खून से लाल हो गई हैं, लेकिन क्या इससे वहां की जनता की समस्याएं हल हो जाएंगी? नेपाल में जो हो रहा है, उससे भारतीय जनता को बहुत कुछ सीखने लायक है।
