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मुनाफे के लोभ में जीएसटी का ‘पंक्चर’!..स्लैब चेंज होने से डीलरों को लगा २,५०० करोड़ रुपए का फटका

– शोरूम में पड़ी हैं एक लाख कारें

सामना संवाददाता / मुंबई

जीएसटी के नए स्लैब आने के बाद देश के कार बाजार में मंदी देखी जा रही है। डीलर परेशान हैं, क्योंकि मुनाफे के चक्कर में जीएसटी ने उनका ‘पंक्चर’ कर दिया है। उन्होंने २८ फीसदी जीएसटी भरकर त्योहारी सीजन के लिए कारों का जो स्टॉक जमा किया है, लोग उसे १८ फीसदी जीएसटी में मांग रहे हैं। ऐसे में कार बेचने के लिए यह छूट डीलरों को अपनी जेब से भरनी पड़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक देश के शोरूम में करीब एक लाख कारें पड़ी हुई हैं। स्लैब चेंज होने से डीलरों को करीब २,५०० करोड़ रुपए का फटका लगना तय है।
कार डीलर्स की बढ़ेंगी मुश्किलें!
जीएसटी स्लैब में बदलाव के बाद कार डीलर्स मुश्किल में हैं। उन्होंने पहले से ऊंची जीएसटी देकर जो कार स्टॉक में रखी है, खरीददार उस पर १८ फीसदी जीएसटी ही देने को तैयार हैं। ऐसे में डीलरों को अपनी जेब से छूट देनी पड़ रही है। जानकारों का मानना है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो कार डीलरों की वर्विंâग वैâपिटल ही खत्म हो जाएगी और वे मुसीबत में आ जाएंगे।
कार शोरूम खाली पड़े हैं। अगर कोई आ रहा है तो कार डीलर्स अपने स्टॉक को खाली करने का प्रयास कर रहे हैं और कार की कीमत के पीछे का गणित समझाने का प्रयास कर रहे हैं। जीएसटी में बड़े बदलाव ने कई कारों पर दरों को कम कर दिया है और सेस को भी हटा दिया है, जिससे कारों के सस्ते होने की उम्मीद है, लेकिन जिन डीलरों ने पुरानी कीमतों पर निर्माताओं से कारें मांगी हैं, उन्हें उस पर जीएसटी और सेस का भुगतान करना पड़ा है। वे कारें, जो डीलरों ने आने वाले त्योहारी सीजन के कारण स्टॉक कर ली थीं, अब बेचना मुश्किल साबित हो रहा है, क्योंकि ग्राहक पुरानी दर पर कारें खरीदने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में अब कार डीलरों को अपनी जेब से उन कारों पर छूट देनी पड़ रही है। कार बाजार के जानकारों के अनुसार, अनुमान है कि उन्हें २,५०० करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है, जिससे उनकी वर्विंâग वैâपिटल खत्म हो जाएगी। उन्हें यकीन नहीं है कि रिफंड के मामले में कुछ राहत मिलेगी या नहीं और यह राहत कहां से आएगी।

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