हिमांशु राज
दिल्ली हाईकोर्ट में करिश्मा कपूर के बच्चों समायरा और कियान द्वारा दिवंगत पिता संजय कपूर की ₹30,000 करोड़ की संपत्ति में हिस्सेदारी की याचिका की सुनवाई के दौरान विवाद और गहराता जा रहा है। बच्चों ने आरोप लगाया है कि उनकी सौतेली मां प्रिया सचदेव कपूर ने वसीयत में हेराफेरी करके उन्हें विरासत से बाहर रखा है। इसके जवाब में प्रिया के वकीलों ने बताया कि बच्चों को पहले ही फैमिली ट्रस्ट से लगभग ₹1900 करोड़ की संपत्ति दे दी गई है और यह मामला इसलिए मान्य नहीं है।
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने प्रिया को निर्देश दिया है कि वे संजय कपूर की सभी चल और अचल संपत्तियों की पूरी सूची अदालत में पेश करें। न्यायालय ने यह भी कहा है कि मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी। सुनजय कपूर की मौत 12 जून को इंग्लैंड में पोलो खेलते समय हुई थी, जिसके बाद यह संपत्ति विवाद शुरू हुआ।
इस संपत्ति विवाद में कई पक्ष शामिल हैं: संजय कपूर की मां रानी कपूर, उनकी मौजूदा पत्नी प्रिया सचदेव, और पूर्व पत्नी करिश्मा कपूर के बच्चे। रानी कपूर ने भी आरोप लगाया है कि उन्हें संपत्ति में उचित हिस्सा नहीं मिला है और कई दस्तावेज भी साझा नहीं किए गए। प्रिया सचदेव ने कोर्ट में यह तर्क दिया कि वे संजय की कानूनी विधवा हैं, इसलिए संपत्ति पर उनका अधिकार है।
करीब 15 साल तक करिश्मा कपूर और उनकी बच्चों की पारिवारिक जिंदगी में अनुपस्थिति और फिर अचानक उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने को लेकर भी प्रिया के वकीलों ने सवाल उठाए हैं। समायरा और कियान ने वसीयत की वैधता को चुनौती दी है और कहा है कि वह रजिस्टर्ड नहीं थी, इसलिए उस पर संदेह होना लाजिमी है।
संपत्ति के बंटवारे की इस जटिल लड़ाई में कोर्ट ने प्रिया को विस्तार से संपत्ति का ब्यौरा देने और सभी पक्षों के वकीलों से जवाब मांगने के बाद, सुनवाई को अगली तारीख पर टाल दिया है। इस विवाद का फैसला आने वाले महीनों में हो सकता है, क्योंकि सभी पक्ष अपना-अपना हक पाने के लिए कानूनी लड़ाई में हैं।
करिश्मा कपूर के बच्चे अपने पिता की विशाल संपत्ति में अपना हिस्सा की मांग कर रहे हैं और महज ₹1900 करोड़ मिलने के आरोप को अस्वीकार कर रहे हैं, जबकि प्रिया सचदेव उनका दावा मानने से इनकार कर रही हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले में पारदर्शिता और स्पष्टीकरण के लिए प्रिया से संजय कपूर की सारी संपत्तियों की सूची देने को कहा है, जिससे विवाद का निष्पक्ष समाधान हो सके।
