मुख्यपृष्ठसमाचारअदालत समाधान का अंतिम रास्ता हो, पहला नहीं : न्यायाधीश

अदालत समाधान का अंतिम रास्ता हो, पहला नहीं : न्यायाधीश

जनपद न्यायालय परिसर में लघु नाटकों के माध्यम से जागरूकता अभियान
राजेश सरकार / प्रयागराज
उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेश और जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष संजीव कुमार के निर्देश पर ३० सितंबर तक चलने वाले मध्यस्थता अभियान के तहत बुधवार को जनपद न्यायालय प्रयागराज में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन प्राधिकरण के सचिव दिनेश कुमार गौतम की अध्यक्षता में किया गया। इसमें पति-पत्नी के आपसी विवादों पर आधारित लघु नाटक ‘प्रतिष्ठा का संघर्ष’, ‘क्रूरता की दीवार’ एवं ‘दर्द की जड़’, का मंचन कर न्यायालय परिसर में उपस्थित जनमानस को मध्यस्थता के प्रति जागरूक किया गया।

लघु नाटकों में दर्शाया गया कि पति-पत्नी के बीच होने वाले आपसी विवाद, गलतफहमी और पारिवारिक तनाव जब अदालत तक पहुंच जाते हैं तो समाज में केवल परिवार ही नहीं, बल्कि रिश्तों की गरिमा भी प्रभावित होती है। न्यायाधीश की भूमिका स्वयं अपर एवं सत्र न्यायालय न्यायाधीश व जिला विधिक प्राधिकरण सेवा के सचिव दिनेश कुमार गौतम ने निभाई। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि अदालत समाधान का अंतिम रास्ता हो, पहला नहीं। कलाकारों ने अपने अभिनय से संदेश दिया कि पति-पत्नी का संघर्ष यदि आपसी संवाद और समझ से हल नहीं हो तो वह न्यायालय की दहलीज तक पहुंच जाता है। अदालत में दोनों पक्ष अपनी पीड़ा और तर्क रखते हैं, परंतु अंततः मेडिएशन (सुलह-समझौते की प्रक्रिया) के माध्यम से रिश्ते को नया जीवन मिलता है।

जज का पूरा फोकस न्यायालय की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्षों को न्यायपूर्ण समाधान की ओर प्रेरित करना रहा। पति की भूमिका में जिज्ञासु चौहान डॉक्टर अजय मेहरा, प्रवीण कुमार त्रिपाठी, अनीश शर्मा, विपिन सहायक, डॉ आरव मेहता पत्नी डॉ सीमा मेहरा, प्रज्ञा शर्मा ने डॉ प्रिया की भूमिका निभाई। अनुष्का कुशवाहा, पूजा यादव और आरती यादव ने पत्नी और वकील की भूमिका में विकास गुप्ता और निखिल मिश्रा, मेडिएटर की भूमिका में देवेश शुक्ला, रेनू देवी, प्रतिभा मिश्रा, आशीष ने पेशकार की भूमिका तथा संगीत स्वर अमित यादव का रहा। नाट्य लेखन एवं निर्देशक ऋतंधरा मिश्रा ने बताया कि इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य यह संदेश देना है कि वैवाहिक संबंधों में विश्वास, संवाद और सहिष्णुता आवश्यक है। अदालत तक पहुंचने से पहले विवाद का समाधान मेडिएशन और परामर्श से किया जा सकता है। परिवार का टूटना केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि पूरे समाज की संरचना को प्रभावित करता है। इन नाटकों ने दर्शकों को गहन आत्ममंथन करने पर विवश किया और यह स्पष्ट किया कि समझौता ही संबंधों को बचाने का सशक्त उपाय है। जज दिनेश कुमार गौतम ने दर्शकों एवं समाज से अपील की कि पति-पत्नी के मतभेद को संवाद, सहयोग और संवेदना से सुलझाएं। अदालत समाधान का अंतिम रास्ता हो, पहला नहीं। साथ ही विधिक प्राधिकरण के अभियान और योजनाओं के बारे में बताया। इस मौके पर वरिष्ठ रंगकर्मी विनय श्रीवास्तव समेत सभी कलाकारों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह जानकारी सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से दी गई।

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