सामना संवाददाता / मुंबई
म्हाडा की घरों की लॉटरी में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, भटके-विमुक्त जमातियों समेत अन्य कई वर्गों के लिए कुल ५० प्रतिशत आरक्षण लागू है, लेकिन ओबीसी वर्ग को इसमें स्थान नहीं मिला है। शिक्षा, नौकरी और स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में आरक्षण मिलने के बावजूद म्हाडा की लॉटरी में ओबीसी को आरक्षण नहीं होने पर राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ ने राज्य सरकार से इसकी मांग की है।
मंगलवार को सह्याद्रि अतिथिगृह में इस विषय पर बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में गृहनिर्माण विभाग और म्हाडा के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। अधिकारियों ने जानकारी दी कि म्हाडा की लॉटरी में अनुसूचित जाति के लिए ११ प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए ६ प्रतिशत, भटके जमाती के लिए १.५ प्रतिशत, विमुक्त जमाती के लिए २.५ प्रतिशत, पत्रकार, स्वतंत्रता सेनानी के वारिस और दिव्यांगजनों के लिए भी तय अनुपात में आरक्षण है।
म्हाडा का स्पष्टीकरण
इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ ने म्हाडा के घरों की लॉटरी में ओबीसी को भी आरक्षण देने की मांग रखी। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार राज्य सरकार का है, ऐसा म्हाडा की ओर से स्पष्ट किया गया। सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में लॉटरी में ५० प्रतिशत आरक्षण होने के कारण और अधिक आरक्षण जोड़ना संभव नहीं है। इसके बावजूद ओबीसी महासंघ ने अपनी मांग राज्य सरकार के सामने रख दी है। अब सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
