सूफी खान
पहले कतर पर हमला हुआ, अब अगला नंबर तुर्की का है और अब इजरायल का ऐसा कहर बरपेगा मुस्लिम दुनिया के ताकतवर मुल्क तुर्की पर कि दुनिया देखेगी। जी हां, चर्चा है कि इजरायल का निशाना अब तुर्की है। तुर्की तो नाटो का मेंबर भी है और उसकी फौज मजबूत होने के साथ ही एडवांस हथियारों से लैस है। तो उसे कुछ नहीं होगा ये समझना बड़ी भूल होगी, क्योंकि तुर्की भी कतर की तरह डबल गेम खेलता है। एक तरफ गाजा में इजरायली आक्रामकता की तुर्की निंदा करता है और दूसरी तरफ इजरायल को तेल भेजता है। तुर्की की एंबेसी इजरायल में है, सीरिया में तुर्की की वजह से ही जौलानी हुकूमत बनी, जिसने फिलिस्तीन की आजादी की जंग लड़ने का दावा कर रहे संगठनों की मदद का रास्ता बंद कर दिया। बावजूद इसके इजरायल तुर्की पर अटैक करेगा।
कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि इजरायली खुफिया एजेंसियों ने अब तुर्की को टारगेट पर ले लिया है। कतर पर हमला हुआ, लेकिन अमेरिका का सबसे बड़ा मिलिट्री एलाय होकर भी कतर को अमेरिका ने नहीं बचाया। बाद में अमेरिका ने थोड़े बहुत अफसोस का इजहार करके खानापूर्ति कर ली।
तुर्की पर आगे हमला हो सकता है इसकी एक बड़ी वजह जानकार बताते हैं कि हमास के नेता अब समझ गए हैं कि गाजा के बाद अब तेहरान और दोहा भी उनके लिए सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे में उनकी आखिरी शरणस्थली तुर्की है। हमास ने यहां भी अपने ऑफिस बना रखे हैं।
कतर जिस पर ये हमला हुआ है, खाड़ी के दीगर मुल्कों के साथ उसके इतने गहरे संबंध नहीं हैं, जितने तुर्की के साथ हैं। चाहे वो आर्थिक हों या सैन्य। क्या तुर्की अपने दोस्त कतर पर हुए हमले पर कोई एक्शन लेगा? फिलहाल, तुर्की चुप है।
लेकिन बड़ा सवाल ये है कि एर्दोगान की सियासत को देखते हुए नाटो मुल्क ऐन वक्त पर तुर्की का साथ न दें। नाटो सामूहिक सुरक्षा का सिद्धांत कहता है कि किसी सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाता है। लेकिन इसमें सभी देशों की सहमति जरूरी है और यहीं पर तुर्की की मुश्किलें बढ़ती हैं। क्या अमेरिका कभी इजरायल के खिलाफ तुर्की का साथ देगा? यूरोपीय देश भी इजरायल के खिलाफ नहीं जाएंगे। नाटो का कवच भी तुर्की को शायद ही बचा पाए। भले ही डोनाल्ड ट्रंप के तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयप एर्दोगन के साथ घनिष्ठ व्यक्तिगत और व्यावसायिक संबंध हों, लेकिन जब कतर में अमेरिका कुछ नहीं कर पाया और चुप रहा तो तुर्की को वैâसे सेफ करेगा। या तो तुर्की भी हमास को अपने देश से खदेड़ेगा या फिर हमास के लिए इजरायल से दो-दो हाथ करेगा। ये बड़ा सवाल है।
