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सुल्तानपुर को कुशभवनपुर बनाने के लिए सनातनधर्मियों ने की अयोध्या से कुशनगरी की पदयात्रा

•पदयात्रियों की मांग-सुल्तानपुर का सरकार पुनः रखे पौराणिक नाम

सामना संवाददाता / सुल्तानपुर

भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं सनातन परंपराओं को जीवंत रखने व सुल्तानपुर का नाम फिर से कुशभवनपुर करने के लिये सनातनधर्मियों ने अयोध्या से कुश की नगरी सुल्तानपुर तक पदयात्रा की। अखिल भारतीय परशुराम एकता समिति ने कटका क्लब, राष्ट्रीय गौरक्षा वाहिनी,विहिप, अहिप आदि अनेक स्थानीय संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इस यात्रा को “भारतीय संस्कृति पदयात्रा” नाम दिया।रामनगरी अयोध्या धाम से प्रातः सात बजे सभी सनातनी साथियों ने जल संकल्प लेकर यात्रा की शुरुआत की। साधु-संतों का आशीर्वाद प्राप्त करने के पश्चात यह यात्रा बाईपास मार्ग होते हुए सुल्तानपुर रोड की ओर बढ़ी।

पहला पड़ाव अवध विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर स्थित तक्षशिला आईएएस कोचिंग रहा। यहां लोगों ने पुष्पवर्षा कर पदयात्रियों की अगवानी की। इसके बाद यात्रा पुनः सुल्तानपुर की ओर प्रस्थान कर गई। मार्ग में अनेक स्थानों पर स्थानीय नागरिकों ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। पुष्पवर्षा एवं जलपान की व्यवस्था की गई। दोपहर २ बजे यात्रा कटका बाज़ार पहुँची, जहाँ से बड़ी संख्या में सनातनधर्मी इस पदयात्रा में शामिल हो गए। कटका से रवाना होकर यह पदयात्रा सुल्तानपुर ज़िलाधिकारी कार्यालय पहुंची। जहां पदयात्रियों ने डीएम के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपते हुए तीन मुख्य मांगें रखीं। प्रथम, गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित किया जाए। द्वितीय, देवी-देवताओं के भेष में नृत्य कर अपमान करने वालों पर प्रतिबंध लगे। तृतीय, सनातन परंपराओं के संरक्षण के लिये सनातन बोर्ड का गठन किया जाए और सुल्तानपुर का नाम पुनः कुशभवनपुर किया जाय। इसके बाद यात्रा सीताकुंड पहुँची, जहाँ भगवान कुश एवं गोमती माता की आरती के पश्चात कल्पवृक्ष पूजन के साथ धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। सभी सहभागी संस्थाओं और समाजसेवियों का सम्मान किया गया।

अंत में पर्यावरण पार्क स्थित कैफ़े रेस्टोरेंट में सनातनी समाज की बैठक हुई। आयोजन में परशुराम एकता समिति के ओमप्रकाश गौतम, प्रदेश प्रभारी संतोष मिश्र, राष्ट्रीय गौरक्षा वाहिनी गौ सेवा संघ के प्रदेश प्रभारी सर्वेश कुमार सिंह,भगवान परशुराम एकता के प्रदेश अध्यक्ष ऋषभदेव शुक्ल, जिला मंत्री महंत तिवारी,संगठन मंत्री दिलीप पांडे आदि ने बढ़चढ़कर भागीदारी की। यात्रा के जरिये सनातनी श्रद्धालुओं को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य किया गया। वाहिनी के सर्वेश सिंह ने गौरक्षा, सनातन परंपराओं की रक्षा और संस्कृति संरक्षण जैसे बड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
इस अवसर पर विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों की सक्रिय सहभागिता रही।

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