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उल्हासनगर में बोगस मतदान को लेकर राइट टू रिकॉल पार्टी का विरोध, पीएम-सीएम को भेजे पोस्टकार्ड

अनिल मिश्रा / उल्हासनगर
उल्हासनगर में बोगस मतदान और ईवीएम की कथित गड़बड़ियों को लेकर राइट टू रिकॉल्स पार्टी ने जोरदार विरोध दर्ज कराया है। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पोस्टकार्ड भेजकर इस मुद्दे पर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

राइट टू रिकॉल पार्टी के अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने दावा किया कि ईवीएम मशीनों से मत विभाजन और हैकिंग संभव है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य की वर्तमान सरकार ईवीएम की “कृपा” से सत्ता में आई है। पार्टी ने एक डेमो दिखाकर यह साबित करने की कोशिश की कि किस तरह एक ही वोट मशीन द्वारा अलग-अलग उम्मीदवारों के खाते में दर्ज हो सकता है।

अमित उपाध्याय ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयुक्त को सार्वजनिक रूप से चुनौती दी थी कि वह ईवीएम मशीन को हैक कर दिखा सकते हैं। इसके लिए उन्होंने चुनाव आयोग को निर्धारित शुल्क भी जमा किया, लेकिन आरोप लगाया कि बाद में चुनाव आयुक्त अपने वादे से मुकर गए। उपाध्याय ने कहा कि यह चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

पार्टी ने हाल ही में एक प्रदर्शन में यह भी दिखाया कि किस तरह प्रमोद अग्रवाल के हाथों वोट चोरी होता है और जनता का अधिकार छीना जाता है। इस प्रदर्शन के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पोस्टकार्ड भेजकर मांग की कि चुनाव प्रणाली की समीक्षा की जाए और बोगस मतदान को रोका जाए।

इस आंदोलन का असर अब स्थानीय स्तर से बाहर निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। राइट टू रिकॉल पार्टी ने दावा किया कि देशभर में ईवीएम की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर पूरे देश में उग्र आंदोलन की स्थिति पैदा कर दी है और ईवीएम को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं।

पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनाया जाता, लोकतंत्र की नींव कमजोर होती जाएगी। उन्होंने मांग की कि मतपत्र आधारित चुनाव प्रणाली को फिर से लागू किया जाए ताकि किसी भी तरह की धांधली और हैकिंग की संभावना न रहे।

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