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महायुति सरकार में क्षीण हो रही है सामाजिक एकता…शरद पवार ने वर्तमान माहौल पर जताई नाराजगी

सामना संवाददाता / मुंबई

सरकार को किसी एक जाति-धर्म की नहीं होनी चाहिए। सरकार व्यापक और समावेशी होनी चाहिए। सरकार किसी एक जाति की नहीं, बल्कि हर जाति-धर्म की होनी चाहिए। सामाजिक एकता महाराष्ट्र की विशेषता रही है। इस सामाजिक एकता को बनाए रखना चाहिए, लेकिन अब यह एकता क्षीण हो रही है। उक्त बातें कहते हुए राकांपा (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता शरद पवार ने वर्तमान केंद्र की मोदी और राज्य की महायुति सरकार पर अपरोक्ष रूप से हमला बोला।
राकांपा (शरदचंद्र पवार) की ओर से रविवार को नासिक के पंचवटी स्थित स्वामी नारायण बैंक्वेट हॉल में एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में शरद पवार उपस्थित थे। शिविर की शुरुआत में शरद पवार ने पत्रकारों से बातचीत की। इस अवसर पर उन्होंने आरक्षण के मुद्दे पर महाराष्ट्र के मौजूदा हालात पर अपनी राय व्यक्त की।
शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र विवि की संकल्पना स्वीकार नहीं
राज्य में इन दिनों शिक्षण संस्थानों को यूनिवर्सिटी का दर्जा देकर उन्हें स्वायत्त अर्थात स्वतंत्र विश्वविद्यालय बनाने का काम तेजी से शुरू है, लेकिन शिक्षण संस्थानों को प्रâी कर देना उचित नहीं है। ऐसा मत प्रकट करते हुए एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि स्वतंत्र विश्वविद्यालय बनाने का विषय स्वीकार नहीं है। मेरी बारामती की विद्या प्रतिष्ठान संस्था में ३५,००० छात्र पढ़ाई करते हैं, लेकिन हमने भी स्वतंत्र विश्वविद्यालय का विचार टाल दिया है।

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